इसके पहले कि इस चट्टान के बारे में भूगर्भशास्त्रियों के हिसाब से इसका शुष्क इतिहास शुरू करूं, कुछ बातें आम आदमी के अहसास के हिसाब से कहना चाहता हूं। पहली बात तो यह है कि छोटी सी पहाड़ी की तरह की दिखने वाली इस चट्टान की ऊंचाई कम होने के कारण आप आसानी से इस पर चढ़ जाएंगे। जब ऊपर पहुंचेंगे तो बंगलुरु शहर बहुत ही खूबसूरत दिखाई देगा। चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखेगी। आंखों को सुकून मिलेगा। लेकिन असली बात है कि चट्टान पर बैठकर मूंगफली (चिनियाबदाम) खाने का मजा ही कुछ और है। कोई साथ हो तो और भी अच्छा लगेगा। चट्टान पर कई लोग पास-पास बैठकर मूंगफली खाते दिखाई भी पड़े। चट्टान के नीचे आपको मूंगफली बेचने वाले मिल जाएंगे। असल में टाइम पास करने की यह अनोखी जगह है। बंगलुरु की सुखद धूप का आनंद उठाते हुए आप क्वालिटी टाइम गुजार सकते हैं। तो यदि आपने अभी तक इसे नहीं देखा है तो अगली बार जरूर जाएं और अपनी पत्नी के साथ बैठकर मूंगफली का मजा उठाएं। आप दोस्तों के साथ इस पर चढ़ने की रेस भी लगा सकते हैं यदि आप रेस लगाने लायक बचे हैं तो।
क्या है इसका इतिहास
बंगलुरु के लालबाग़ उद्यान में एक विशाल चट्टान (hillock) दिखाई पड़ती है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह दुनिया की सबसे पुरानी चट्टान है। यह भी कहा जाता है कि यह पैनीनसुलर गनीस नामक अत्यंत प्राचीन चट्टानी संरचना का हिस्सा है।
पैनीनसुलर गनीस क्या है
यह चट्टान का एक प्रकार है। एक प्रकार का उच्च-ग्रेड रूपांतरित चट्टान जिसमें ग्रेनाइट और माइका जैसे खनिज शामिल हैं। कहा जाता है कि यह लगभग 2.5 से 3.4 अरब वर्ष पुरानी चट्टान है। यह चट्टान मानसून और मानव इतिहास से बहुत पहले बनी थी, इसलिए इसे राष्ट्रीय भू–वैज्ञानिक स्मारक घोषित किया गया, जिसे भारत सरकार की जीएसआई का संरक्षण प्राप्त है। यह एक प्राचीन मेटामॉर्फिक चट्टान है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के क्रेटॉन (प्राचीन भूखंड) जैसे धारवाड़ क्रेटॉन, बस्तर क्रेटॉन और सिंहभूम क्रेटॉन में पाई जाती है। यह चट्टान ग्रेनाइट और अन्य आग्नेय चट्टानों के मेटामॉर्फिज्म (रूपांतरण) से बनती है और इसमें बैंडेड संरचना होती है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे पुराने भूवैज्ञानिक संरचनाओं में से एक है। यह विशेष रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में पाई जाती है। खास तौर पर बंगलुरु और मैसूर के आसपास के क्षेत्रों में यह मिलती है।
चट्टान की विशेषताएं
यह चट्टान बंगलुरु के लालबाग़ के ग्रीष्म और वसंत के प्रवेश द्वारों के पास स्थित एक उभरी हुई टेकरी पर है, जहां पर बंगलुरु के संस्थापक केंपगौड़ा द्वितीय ने 16वीं सदी में एक वॉचटावर बनवाया था ।
चट्टान की चोटी पर यह टॉवर साफ़ तौर पर दिखता है, और इसके नीचे ही एक GSI द्वारा स्थापित बोर्ड लगा है जिसमें इसे राष्ट्रीय भू–वैज्ञानिक स्मारक बताया गया है।
क्यों खास है?
-यह चट्टान हमें पृथ्वी की आरंभिक अवस्था (Archean Eon) की जानकारी देती है, जब हमारी भूरचना विकसित हो रही थी।
-भूविज्ञानी और शोधकर्ता इसे धरती की संरचना एवं भूवैज्ञानिक इतिहास का अध्ययन करने के लिए उपयोग करते हैं।
-सुबह के वॉक के दौरान लोग इस चट्टान पर चढ़कर बैठना पसंद करते हैं और यह पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।
-कठोरता और टिकाऊपन के कारण, पेनिनसुलर गनीस का उपयोग भवन निर्माण, सड़क निर्माण, और पुलों के लिए पत्थरों के रूप में किया जाता है। टाइल्स, स्लैब, और सजावटी पत्थरों के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है, खासकर दक्षिण भारत में।

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