पत्रकारों के करियर में पांच मौके बहुत महत्वपूर्ण और निर्णायक होते हैं। इन मौकों पर पत्रकारों को अपनी काबिलियत को साबित करना होता है। साथ ही ये मौके पत्रकारों के लिए अपनी क्षमता और कौशल को बढ़ाने के लिए भी बेहतरीन होते हैं। आइए समझते हैं कि ये पांच मौके क्या हैं और कब-कब मिलते हैं।
*️⃣ पहला मौका - जब किसी भी मीडिया में जॉब मिलती है।
पत्रकार के लिए यह पहला मौका है जब उसके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव आता है। यहां से जिंदगी का नया दौर शुरू होता है। इसलिए इस मौके पर अपने दिमाग के सारे दरवाजे को खोल देना चाहिए क्योंकि अब जो कुछ भी नया मिलने वाला है, उन्हें आत्मसात करना है। इसके बाद जो भी आपको मिलेगा, वह जीवन भर काम आएगा। इसलिए जो भी मिलता है उसे समेटते चले जाइए बल्कि इस समय खोज-खोजकर ज्ञान, हुनर और कौशल को अपनाते जाइए। ये सभी चीजें जीवन में बहुत काम आने वाली हैं। इस मौके पर कुछ चीजों से दूर रहने की जरूरत है, जैसे -
- पूर्वाग्रह
- इगो
- बदतमीजी
*️⃣ दूसरा मौका - जब पहला प्रमोशन मिलता है।
करियर में पत्रकार के लिए दूसरा मौका तब आता है जब वह पहला प्रमोशन पाता है। प्रमोशन मिलने का एक मतलब यह भी है कि आप सही जा रहे हैं। आप जिम्मेवारियों को अच्छी तरह निभा रहे हैं, आप पॉजिटिव हैं और आपको अपनी इसी लाइन ऑफ एक्शन को बरकरार रखना है। इसका दूसरा मतलब यह है कि अब आपकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। संस्थान ने आप पर भरोसा दिखाया है, उसे बनाए रखना है। अब आपको पहले से बेहतर परफॉर्मेंस देना है। इसमें यदि आप सब एडिटर या रिपोर्टर हैं तो आपको सीनियर सब एडिटर या सीनियर रिपोर्टर बनाया जा सकता है। इस समय भी आपको कुछ चीजों से दूर रहना है, जैसे -
- तकरार
- ईर्ष्या
- गैर जिम्मेदाराना हरकत
*️⃣ तीसरा मौका - जब बड़ी जिम्मेदारी मिलती है।
यह ऐसा मौका है जो थोड़ी मुश्किल से मिलता है। इसमें आप सीनियर सब एडिटर या रिपोर्टर से चीफ सब एडिटर या चीफ रिपोर्टर बनाए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि आप अब एक टीम को लीड करेंगे और किसी टीम को लीड करने का मतलब है लीडर बनना। लीडरों में कुछ खास क्वालिटी होनी चाहिए जिसके दम पर वह अपनी टीम का भरोसा जीतता है, अपनी टीम पर भरोसा करना भी आना चाहिए। संस्थान ने आपके अंदर यह क्वालिटी देखी है। इसलिए आपको इसे साबित भी करना होगा। साथ ही अपनी टीम से काम भी लेना है। इस अवसर पर आपको अपनी इस क्वालिटी को और विकसित भी करना है ताकि भविष्य में और बड़ी भूमिका के लिए तैयार हो सकें। इस समय भी आपको कुछ चीजों से दूर रहना चाहिए, जैसे -
- अनुशासनहीनता
- काम में ढिलाई
- हल्का व्यवहार
*️⃣ चौथा मौका - जब जिम्मेदारी और बड़ी हो जाती है।
चीफ सब एडिटर या चीफ रिपोर्टर डेस्क कर्मियों या रिपोर्टर की एक छोटी टीम को लीड करता है लेकिन जब इससे आगे का प्रमोशन मिलने के बाद आप डिप्टी न्यूज एडिटर बनेंगे या इसके समान किसी पद पर जाएंगे तब आपको और बड़ी भूमिका मिलेगी। हो सकता है आप पूरे संस्करण के इंचार्ज बना दिए जाएं या इसके बराबर की कोई जिम्मेदारी मिले। इसमें आपको छोटी टीम नहीं बल्कि काम का बड़ा सा इलाका मिलता है। यहां आपको एक बड़ा मौका मिलता है नेतृत्व की क्षमता, टीम चलाने की सूझबूझ, जिम्मेवारियां संभालने की कूवत और क्राइसिस मैनेजमेंट का हौसला सबकुछ साबित करने का। इस समय आपको इन चीजों से परहेज़ करना है
- कोताही
- लूज टॉक
- पक्षपात
पांचवां मौका - जब संपादक की जिम्मेदारी मिलती है।
यहां तक पहुंचना हर किसी का सपना होता है। इस मौके का मिलना आपकी मंजिल हो सकती है लेकिन आपको सुस्ताना नहीं है बल्कि दोगुने जोश के साथ काम करना है क्योंकि यहां आप पर ही पूरा दारोमदार है। आप जिस कश्ती पर सवार हैं, उसके खेवनहार भी आप ही हैं और पतवार भी। इसलिए अपनी अक्ल और सूझबूझ से नाव चलाते हुए मंजिल तक इसे पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। आप पर दोस्तों की नजर होगी और दुश्मनों की भी। चौबीस घंटे आप पर प्रबंधन की नजर भी बनी रहेगी। यहां आपको अब तक सीखे हुए अपने हर हुनर और कौशल को झोंक देना है। यहां आपको टीम नहीं चलाने के लिए पूरा अखबार मिलेगा। अखबार के कई संस्करण मिलेंगे यानी काम करने और खुद को साबित करने का भरपूर मौका मिलेगा। खुलकर काम कीजिए और करवाइए। चूंकि आप पूरे संस्करण के अभिभावक हैं, इसलिए लेकिन अपने अंदर इन गुणों को बरकरार रखिए, जैसे,
- संवेदनशीलता
- विनयशीलता
- दयालुता
कुछ चीजों से बचकर रहिए, जैसे -
- चुगली
- चापलूसी
- चौपाल
ये पांच मौके सिर्फ पत्रकारिता ही नहीं, हर करियर में मिलते हैं। तो यह फार्मूला सभी नौकरी-पेशा पर लागू हो सकता है। आप किसी भी तरह की नौकरी करते हैं, इस फार्मूले को गांठ बांध लीजिए, आज़मा लीजिए, गारंटी है निराश नहीं होंगे।
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