Saturday, 14 June 2025

संडे पोस्ट - जब दफ्तर का माहौल काटने को दौड़े

मैं जब पटना में एक राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक अखबार के प्रादेशिक संस्करण में था तब दोपहर दो बजे दफ्तर जाते समय कई बार ऐसा लगता था कि दफ्तर नहीं जाकर कहीं भाग जाऊं। क्यों? क्योंकि दफ्तर का माहौल इतना भीषण था कि काटने को दौड़ता था। दफ्तर को लेकर ऐसा डरावना अहसास हो तो आदमी क्या करे। मेरे दफ्तर का माहौल इतना जहरीला था कि उसे बर्दाश्त करने के लिए विशेष तरह की ऊर्जा की जरूरत होती थी। लेकिन अपने भाग जाने वाले ख्याल को जबरदस्ती दबाकर मैं दफ्तर पहुंचता था और फिर सब कुछ ठीक हो जाता था। क्यों? क्योंकि मैं हर तरह के जहरीले माहौल का सामना करता था। माहौल जहरीला है तो उससे बचने का सबसे कारगर उपाय है उसका सामना करना। 

यदि आपको भी कभी ऐसा महसूस हो तो आप निम्न कुछ कामों से दफ्तरी जहर का एंटी डॉट तैयार कर सकते हैं- 

*️⃣ आप दफ्तर दस मिनट पहले पहुंचें और काम खत्म होने या ड्यूटी खत्म होने के आधे घंटे बाद निकलें। आपके ऐसा करते ही जहरीले माहौल में दरार पड़ने लगेगी। 

*️⃣ दफ्तर में व्यस्त रहें। मस्त रहें और यदि मस्त नहीं रह पा रहे हैं तो मस्त रहने का स्वांग जरूर करें।

*️⃣ जहरीले साथियों के साथ ज्यादा से ज्यादा आमना-सामना करें।

*️⃣ दफ्तर के माहौल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ऊंची आवाज में बोलना भी जरूरी है। इसके लिए मौका तलाशें और मौका मिलते ही फट पड़ें।

इतने में ही जहर का एंटी डॉट तैयार हो जाएगा। यकीन मानिए फिर दफ्तर काटने के लिए नहीं दुलारने के लिए दौड़ेगा।

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