Friday, 6 June 2025

कितनी खतरनाक है डंकी रूट की पत्रकारिता

डंकी रूट से हर कोई परिचित हैं। यह माइग्रेशन का अवैध रूट है जिसकी सहायता से बिना वैध कागजातों के एक देश से दूसरे देश में प्रवेश किया जाता है। पत्रकारिता में भी ऐसे डंकी रूट हैं जिससे बिना वैध आइडेंटिटी और प्रशिक्षण के इस क्षेत्र में घुसपैठ की जाती है और फिर पत्रकारिता के मानकों की धज्जियां उड़ाई जाती है। ये वे लोग हैं जिनका उद्देश्य पत्रकारिता करना नहीं है बल्कि पत्रकारिता के नाम का इस्तेमाल किसी अन्य स्वार्थ को पूरा करना होता है। डंकी रूट की पत्रकारिता का मतलब है गैर-पारंपरिक, अनैतिक या शॉर्टकट तरीकों से खबरें बनाना या पत्रकार बनने की कोशिश करना। 

डंकी रूट एक ऐसा तरीका है जिसका इस्तेमाल कर लोग पत्रकारिता का उपयोग गलत मंसूबों को पूरा करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग अक्सर अवैध या अनैतिक तरीकों से समाचार इकट्ठा करने या जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस तरीके से बनाया गया समाचार समाज के लिए घातक हो सकता है, सामाजिक ताना-बाना को नुक़सान पहुंचा सकता है। ऐसे समाचारों का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए भी किया जा सकता है। कुछ उदाहरणों से बात स्पष्ट हो सकेगी -

*️⃣ फेक न्यूज 

डंकी रूट की पत्रकारिता में फेक या फर्जी न्यूज बनाना और फैलाना सबसे बड़ा काम है। आज की दुनिया में फेक न्यूज सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। इससे बचना मुश्किल है क्योंकि इसे बनाने में डंकी रूट वाले पत्रकारों के साथ वे भी शामिल हो रहे हैं जो प्रशिक्षित पत्रकार हैं। बिना सत्यापन के बनाई गई कोई भी खबर फेक न्यूज है। 

*️⃣ नैतिक मापदंडों का उल्लंघन 

पत्रकारिता में डंकी रूट का उपयोग अक्सर पत्रकारिता के नैतिक मानकों का उल्लंघन करता है और खबरों को सनसनीखेज बनाता है। इससे समाचार की विश्वसनीयता और पत्रकारिता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। पत्रकारों को हमेशा नैतिक मानकों का पालन करना चाहिए और जानकारी प्राप्त करने के लिए वैध और पारदर्शी तरीकों का उपयोग करना चाहिए।

*️⃣ स्रोतों का स्पष्ट नहीं होना 

डंकी रूट की पत्रकारिता में स्रोत स्पष्ट नहीं होते हैं और कभी-कभी तो खबरों में कोई स्रोत होता ही नहीं है। बिना स्रोत की खबरें रिपोर्टर की कपोल कल्पना मानी जाती है। इसमें अविश्वसनीय या अनैतिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त की जाती है। जानकारी प्राप्त करने के लिए छिपे हुए या धोखेबाज़ तरीके को अपनाया जाता है।

*️⃣ माइक उठाया और बन गए रिपोर्टर 

कुछ लोग बिना जर्नलिज्म की डिग्री या अनुभव के, सोशल मीडिया या अवैध माध्यमों से सिर्फ माइक उठाकर पत्रकार बन जाते हैं। ऐसे लोगों को पत्रकारिता के कायदे-कानून पता नहीं होते हैं और वे सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए खबरें बनाने लगते हैं। ऐसे लोग सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर खबरों को नाटकीय ढंग से पेश करते हैं। आज तो यह खुले आम हो रहा है। 

*️⃣ दबाव की पत्रकारिता 

डंकी रूट की पत्रकारिता का खास चरित्र है कि यह या तो किसी पर दबाव डालने या किसी दबाव में आकर की जाती है। यह दोनों स्थिति पत्रकारिता के लिए घातक है।

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