पत्रकारिता के कुछ छात्रों/छात्राओं ने पूछा, हिंदी को कैसे सुधारें, वर्तनी को कैसे ठीक करें, इसके लिए कोई किताब मिलती है क्या। इन प्रश्नों के जवाब में मैंने पोस्ट लिखकर बताया था कि हिंदी को सुधारना है तो हिंदी में खूब लिखना होगा। मैंने यह भी बताया था कि लिखने का तरीका क्या होगा, कैसे लिखना है। मैंने एक माह का टास्क दिया था जिसे आपको करना है। एक माह बाद इसके रिजल्ट से मुझे अवगत कराना है फिर आगे का रास्ता मैं बताऊंगा।
इस बीच आज मैं आपको हिंदी बोलने का भी टास्क देना चहता हूं। आप सोचिए जब आप अंग्रेजी बोलते हैं तो कितना सतर्क रहते हैं। एक-एक शब्द नाप-तोल कर बोलते हैं। डरते रहते हैं कि कोई शब्द या वाक्य गलत न हो जाए। आपको चिंता रहती है कि गलत बोल दिया तो सामने वाला क्या सोचेगा। लेकिन जब आप हिंदी बोलते हैं तो बिंदास रहते हैं। कुछ भी बोल देते हैं। सड़क को सरक बोल देते हैं। शक्कर को सक्कर बोल देते हैं। पानी को स्त्रीलिंग बना देते हैं, जिंदगी को पुलिंग बना देते हैं। हिंदी बोलते समय आप यह नहीं सोचते कि सामने वाला क्या सोचेगा। आप ऐसा इसलिए करते हैं कि हिंदी आपकी अपनी भाषा है। लेकिन यह कैसी सोच है, दूसरे की चीज को तो आप सहेजकर रखते हैं और अपनी चीज को बेतरतीब ढंग से।
यदि आप सचमुच हिंदी सुधारना चाहते हैं तो इस सोच से निजात पाना होगा। हिंदी को किसी भी अन्य भाषा की अपेक्षा ज्यादा प्यार और सम्मान देना होगा। बोलते समय भी कोशिश करनी होगी कि आप हिंदी शुद्ध बोलें। इसके लिए अभ्यास करना होगा। आपको यह जानना होगा कि कौन-कौन से शब्द ऐसे हैं जो आप ग़लत बोलते हैं। लेकिन आप जानेंगे कैसे? इसके लिए एक तरीका अपनाया जा सकता है। तरीका इस प्रकार है -
-आप अच्छे-अच्छे वक्ताओं के भाषण सुनिए। उनके शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए। उनके लिंग प्रयोग पर ध्यान केंद्रित कीजिए। इससे आपको यह अंदाजा मिलेगा कि कौन-कौन शब्द पुलिंग और कौन-कौन से स्त्रीलिंग।
- वक्ताओं में साहित्यिक, विचारक, मोटिवेशनल स्पीकर जैसे लोग शामिल करिए। आपको इनके विचारों को नहीं, इनकी भाषा पर ध्यान देना है।
- आप साहित्यिक कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग सुन सकते हैं। लाइव सुनने को मिले तो और भी अच्छा।
- कवि सम्मेलनों, मुशायरों को सुन सकते हैं। इनमें शुद्ध हिन्दी या उर्दू का इस्तेमाल किया जाता है।
लेकिन ध्यान रहे
- वक्ताओं में राजनेताओं को कतई शामिल नहीं करिएगा। इनकी भाषणों में लपेटने और फेंकने वाले शब्द ज्यादा होते हैं। दूसरी बात, इनका भाषण सुनकर आपकी हिंदी ठीक हो न हो, आपको दिन में सपने देखने की आदत पड़ सकती है।
- वक्ताओं में धर्म गुरुओं, धार्मिक प्रचारकों को भी शामिल नहीं करिएगा। इनकी बातों को सुनकर आपको संसार नश्वर लगने लगेगा। आपके अंदर नैराश्य की भावना उत्पन्न हो सकती है।
सबसे जरूरी बात
आप प्रण कर लें कि परिवार में आपसी बातचीत, दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के दौरान भी आप शुद्ध हिन्दी बोलेंगे। कम से कम शुद्ध हिन्दी बोलने की कोशिश तो शुरू कर ही देंगे।
यह टास्क भी एक माह का है। इसके रिजल्ट से भी मुझे अवगत करा सकें तो अति उत्तम।
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