अव्वल तो कमजोर भाषा (हिंदी या अंग्रेजी) वालों को पत्रकारिता में आना ही नहीं चाहिए और यदि किसी कारणवश आ गए तो सबसे पहले भाषा को सुधारने का काम करना चाहिए। इसके लिए हिंदी में सोचना शुरू कीजिए। फिर इसका अभ्यास हो जाए तो हिंदी सीखने के लिए रोजाना एक या दो घंटे का समय निकालिए। इस समय को पूर्णतः हिंदी की क्लास को दीजिए। अब आप पूछेंगे कि मैं किस क्लास की बात कर रहा हूं। यह क्लास लेगा कौन। तो भाई, यह क्लास आप खुद लेंगे। इस क्लास में शिक्षक भी आप ही होंगे और छात्र भी आप। फिर सवाल उठता है कि आप अपनी क्लास कैसे लेंगे। इसका तरीका मैं बताता हूं।
पहला कदम
सबसे पहले संकल्प लें कि मुझे अपनी हिंदी को मजबूत बनाना है। अपने संकल्प को तारीख के साथ नोट कर लीजिए। संकल्प के बाद यह तय करिए कि सुबह या अपनी सुविधानुसार एक घंटे का समय इस काम में लगाएंगे। फिर तीन काम शुरू करें
- आज के अखबार को पूरा पढ़ना। ध्यान रहे अखबार ऑनलाइन नहीं होना चाहिए।
- अखबार के किसी पेज की लीड खबर को अपनी डायरी में लिखना। खबर को हूबहू डायरी में लिख लीजिए।
- अब इस खबर को अपने हिसाब से दोबारा लिखिए यानी इससे एक नई खबर बनाइए। इस खबर में नए-नए शब्दों का प्रयोग कीजिए। कुछ ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल कीजिए जिसे आप जानते हैं लेकिन उसकी स्पेलिंग में आपको कंफ्यूजन है। अब आप अपने लिखे हुए को किसी जानकार से चेक करा पाएं तो अति उत्तम है। आपको उचित सलाह मिल सकेगी और आपकी गलतियां सही हो जाएंगी।
इस प्रक्रिया को एक माह तक करते रहिए।
दूसरा कदम
रोजाना अखबार पढ़ने के साथ-साथ अच्छी पत्रिकाएं और किताबें पढ़ने की आदत विकसित करिए। किताबों में बड़े साहित्यकारों की रचनाएं शामिल कर सकते हैं।
इन दो कामों का आपको एक माह में रिजल्ट दिखने लगेगा। इन कामों को समझने में कोई उलझन महसूस हो तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं।
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