गधों की रेस में घोड़ा मत बनिए
पत्रकारिता में तीन चीजों से परहेज़ करने की जरूरत है। इसका एक बड़ा फायदा होगा। आपको कभी अफसोस नहीं होगा कि गंगा सामने बह रही थी और आप डुबकी नहीं लगा पाए।
पहली चीज
रेस से कभी बाहर नहीं रहिए। जब घोड़ों की दौड़ हो रही हो तो घोड़ा बनकर दौड़िए। जब गधों की दौड़ हो रही हो तो गधा बनकर दौड़िए। यदि आप गधों की दौड़ में घोड़े की तरह दौड़ेंगे तो odd man out करार दिए जाएंगे।
दूसरी चीज
हमेशा बॉस की बुद्धिमत्ता और कुशलता के अनुसार अपने को ट्यून करके रखिए। यदि आपकी फ्रिक्वेंसी बॉस से अधिक तेज है तो उसे स्लो कीजिए क्योंकि बॉस इज ऑलवेज राइट के साथ-साथ बॉस almighty भी होता है।
तीसरी बात
हमेशा खुशनुमा चेहरा मत बनाए रखिए। इससे लोगों को भ्रम होगा कि आप अपनी वर्तमान स्थिति से खुश हैं या इंक्रीमेंट, प्रमोशन के लिए बॉस के साथ आपकी कोई सीक्रेट डील हो गई है। इसलिए ज्यादातर समय मुंह लटकाकर रहिए, दुखी नजर आइए ताकि सबको लगे आप भी उनमें से एक हैं।
इन तीन सूत्रों को पकड़कर चलिए, भवसागर आसानी से पार हो जाएगा।
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