Wednesday, 24 September 2025

हिंदी के नए और पुराने पत्रकारों में क्या है अंतर

आइए हम हिंदी के नए पत्रकारों और पुराने दौर के पत्रकारों (प्रिंट और पारंपरिक टीवी पत्रकारिता) की तुलना करने की कोशिश करते हैं और समझते हैं कि दोनों की पत्रकारिता में क्या फर्क है।

सबसे पहले हम इन दोनों के खबरों के माध्यम और खबरों तक इनकी पहुंच के बीच के फर्क को देखते हैं-

1. माध्यम और पहुंच
पुराने पत्रकार –इनके लिए खबरों के मुख्य माध्यम न्यूज एजेंसी, अख़बार, पत्रिकाएं और टीवी न्यूज़ चैनल होते हैं। पुराने पत्रकार आज भी खबरें इन्हीं माध्यमों से हासिल करते हैं।
नए पत्रकार –इनके लिए खबरों के माध्यम डिजिटल, यूट्यूब, इंस्टा-रील्स, ट्विटर (X), पॉडकास्ट तक फैले हुए हैं। खबरें 24x7 और वैश्विक स्तर पर पहुंचती हैं।

2. भाषा और शैली
पुराने पत्रकार – गंभीर, औपचारिक और साहित्यिक शैली का इस्तेमाल करते हैं। शुद्ध हिंदी का ज़ोर पर हमेशा से इनका जोर रहा है और आज भी है। अखबारों में अशुद्ध भाषा लिखने वालों को प्रवेश नहीं मिलता है। अंग्रेजी शब्दों का कम से कम इस्तेमाल करते हैं।
नए पत्रकार –अपनी भाषा में धड़ल्ले से अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इनका कोई भी वाक्य अंग्रेजी शब्दों के बिना पूरा नहीं होता है। हिंग्लिश का प्रयोग खूब करते हैं। इसका असर हिंदी भाषा पर नकारात्मक भी होता है।

3. कौशल (Skills)
पुराने पत्रकार – मुख्यतः लेखन या रिपोर्टिंग पर ध्यान देते हैं। फोटोग्राफर और एडिटर अलग होते हैं।
नए पत्रकार – मल्टी-स्किल्ड हैं। लिखते हैं, शूट करते हैं, एडिट करते हैं, थंबनेल बनाते हैं, लाइव भी करते हैं।

4. संवाद (Interaction)
पुराने पत्रकार – एकतरफ़ा संवाद। पाठक/दर्शक को सिर्फ खबर मिलती है, प्रतिक्रिया बहुत सीमित होती है (चिट्ठी या बाद में फोन/ईमेल)।
नए पत्रकार – दोतरफ़ा संवाद। कमेंट बॉक्स, पोल, लाइव चैट और सोशल मीडिया इंटरैक्शन।

5. स्वतंत्रता बनाम संस्थागत बंधन
पुराने पत्रकार – अख़बार या टीवी संस्थान पर निर्भर। संपादक की लाइन ही अंतिम मानी जाती है।
नए पत्रकार – स्वतंत्र यूट्यूब चैनल, ब्लॉग और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म चलाते हैं। अपनी आवाज़ और विचार सीधे जनता तक पहुंचा सकते हैं।

6. गति और सटीकता
पुराने पत्रकार – अख़बार दिन में एक बार निकलता था, टीवी पर भी दिन में बुलेटिन चलता है। खबर आने में समय लगता है लेकिन अधिकतर खबरें तथ्यात्मक और ठोस होती हैं। इनका खंडन मुश्किल होता है।
नए पत्रकार – तुरंत रिपोर्टिंग। ब्रेकिंग पर जोर। स्पीड के चक्कर में कई बार सत्यापन चुनौती बन जाता है।

7. विषय-वस्तु (Content)
पुराने पत्रकार – राजनीति, अर्थव्यवस्था, अपराध, साहित्य और संस्कृति पर अधिक ध्यान।
नए पत्रकार – राजनीति और अपराध के साथ-साथ जेंडर, स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी, पर्यावरण, मनोरंजन, लोकल मुद्दे और सोशल मीडिया ट्रेंड्स तक कवर करते हैं।

8. छवि और ब्रांडिंग
पुराने पत्रकार – पत्रकार का नाम प्रिंट में आता था, लेकिन ब्रांड अख़बार या चैनल होता था।
नए पत्रकार – पत्रकार खुद ही "ब्रांड" बन जाता है।

हम यह कह सकते हैं कि पुरानी पत्रकारिता में गहराई, धैर्य और संस्थागत ताक़त है जबकि नई पत्रकारिता में स्पीड और स्वतंत्रता है।
आज की चुनौती है कि दोनों का संतुलन बने – यानी पुराने दौर की गंभीरता और सटीकता + नए दौर की स्पीड और पहुंच एक साथ मिल जाए तो पत्रकारिता का नया युग शुरू हो सकता है।
#new journalism #old journalism

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