छोटा-बड़ा नहीं होता है इतवार
इतवार तो बस होता है इतवार
सुबह से फुसफुसाता, कुलबुलाता है
दो दिन पहले से धमकाता है इतवार।
AI कोई धीमी आंधी नहीं है, यह एक ऐसा तूफ़ान है जो दुनिया के हर पेशे, हर दफ्तर और हर स्क्रीन को हिला रहा है। आज की सबसे ईमानदार सच्चाई यही है...
No comments:
Post a Comment