Wednesday, 30 July 2025

नकली को सलाम, असली को गुडबाय

चंदूलाल को अपने असली जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले याद आया कि उन्होंने अपना असली वाला जन्मदिन तो आज तक मनाया ही नहीं है। वैसे उन्होंने अपना नकली यानी सर्टिफिकेट वाला जन्मदिन भी कभी नहीं मनाया है लेकिन कागजी जन्मदिन पर कम से कम फेसबुक और दफ्तर के इंट्रा नेट पर उन्हें जन्मदिन मुबारक और शुभकामनाओं वाले ढेरों संदेश तो मिल जाते हैं और उन्हें जन्मदिन मनाने जैसा मज़ा आ जाता है। लेकिन असली वाला जन्मदिन तो बिल्कुल ही अछूत सा कोने में पड़ा रह गया। इसलिए चंदूलाल ने अपने मन में संकल्प लिया कि इस बार असली वाला जन्मदिन मनाया जाए। अपने संकल्प की सूचना उन्होंने पत्नी को दी। पत्नी थोड़ा कुनमुनाई। बुढौती में यह कौन-सा शौक चर्राया है। लेकिन कुछ नहीं बोली। 
चंदूलाल के घर में अब दो ही प्राणी रहते हैं। बेटी और बेटा नौकरी के लिए अलग-अलग शहरों में चले गए थे। बेटी की हाल ही में शादी भी हुई है। इसलिए चंदूलाल मन ही मन योजना बनाने लगे कि असली वाला जन्मदिन कैसे सेलिब्रेट किया जाए। उनके बेटे और बेटी को उनके इस जन्मदिन के बारे में पता है, ऐसा चंदूलाल सोचते थे क्योंकि जब दोनों बच्चे साथ में रहते थे तो चंदूलाल हर साल पांच जून को घर में घोषणा ज़रूर करते थे कि आज मेरा असली वाला जन्मदिन है। पत्नी हैप्पी बर्थडे बोलतीं और बच्चे भी उनका अनुसरण करते। बस, मन जाता था जन्मदिन। लेकिन इस बार की बात को अलग बनाना चाहते थे चंदूलाल। सो, उन्होंने सोचा, क्यों न ड्राइवर को बुलाकर एक दिन के लिए कहीं चला जाए। उनके पास गाड़ी है जो हमेशा खड़ी रहती है। उन्हें ड्राइव करना नहीं आता है। जब बेटा यहां था तब गाड़ी चलती थी। अब वह बाहर रहता है तो गाड़ी कौन चलाए। चंदूलाल कभी-कभी ड्राइवर बुलाकर पत्नी के साथ कनॉट प्लेस घूम आते थे। यही सोचते-साचते चंदूलाल दफ्तर पहुंचे। एक-दो घंटे बाद उन्होंने ड्राइवर से बात भी कर ली। अब उन्होंने सोचा कि मथुरा में बांके बिहारी का दर्शन किया जाए‌। लेकिन दफ्तर में कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें मथुरा जाने का कार्यक्रम बनाने का मौका ही नहीं मिला। फिर मन ही मन मथुरा जाने का प्रोग्राम कैंसल कर दिया। फिर मन में सोचा कि कहीं और चले जाएंगे लेकिन जाएंगे जरूर। जन्मदिन मनाना है तो मनाना है। 
शाम में देर से घर पहुंचे। पत्नी को बताया कि कल ड्राइवर को बुलाया है तो वह उखड़ गईं। कहां जाना है, क्यों जाना है, कितनी बार कहा बिना पूछे कुछ नहीं किया करो लेकिन तुम्हें को अपने मन की पड़ी रहती है। चंदूलाल समझ गए, पत्नी उनका जन्मदिन भूल चुकी हैं और यह भी भूल चुकी है कि इस बार जन्मदिन मनाना भी है। चंदूलाल शांत रहे और फिर उन्होंने फोन करके ड्राइवर को मना कर दिया। इसके बाद चंदूलाल खा पीकर सो गए। 
दूसरे दिन जब उठे तब पांच जून आ गया था। चंदूलाल ने पांच बजे बिस्तर छोड़ दिया। हाथ-मुंह धोकर घर के मंदिर में ईश्वर के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। ईश्वर को उन्होंने सब-कुछ के लिए धन्यवाद दिया और फिर अपने रूटीन में लग गए। सुबह में उनका रूटीन था, पानी गर्म करना, दो कप चाय बनाना और डस्टबिन का कचरा घर के बाहर रखना जहां से सफाई वाला रोज उसे ले जाता था। चंदूलाल ने अपने असली वाले जन्मदिन के मौके पर भी यही किया। गर्म पानी पत्नी के लिए थर्मस में रखा। अपने हिस्से का पानी पिया और चाय पी, पत्नी के लिए चाय का कप ढंककर रखा, पत्नी को जगाया। उन्हें उम्मीद थी कि पत्नी उठने के साथ हैप्पी बर्थडे बोलेंगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता देख वे चुपचाप मॉर्निंग वॉक के लिए निकल पड़े। कुछ देर बाद पत्नी भी मॉर्निंग वॉक पर पहुंच गई। वे दोनों एक ही मैदान में एक-दूसरे के ऑपोजिट डायरेक्शन में घूमते हैं। विपरीत डायरेक्शन का फायदा यह है कि पत्नी की नजर उन पर अधिक देर तक नहीं रहती है। चंदूलाल को उम्मीद थी कि शायद वॉक के दौरान पत्नी को उनका जन्मदिन याद आ जाए लेकिन ऐसा भी हो न सका।
मॉर्निंग वॉक के बाद चंदूलाल कुछ सामान लेने सोसाइटी से बाहर निकल गए। लौट कर जब वे अपने फ्लैट में जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुए तब उनका फोन बजा। उन्होंने फोन देखा तो पत्नी का कॉल था। उनके हलो कहते ही पत्नी की आवाज आई, हैप्पी बर्थडे। चंदूलाल धन्य हो गए। शुक्रिया बोलकर फोन काट दिया। 
अब चंदूलाल सोचने लगे असली से तो नकली वाला जन्मदिन ही ज्यादा अच्छा है। कम से कम रात बारह बजे से फेसबुक पर हैप्पी बर्थ-डे वाली शुभकामनाओं की बारिश तो शुरू हो जाती है। एकाध दोस्त का भी फोन आ जाता है जबकि उन्हें पता होता है कि यह नकली वाला है फिर भी वे फोन करना नहीं भूलते। असली वाले को तो पत्नी तक भी याद नहीं रख पाईं तो दुनिया क्या ख़ाक याद रखेगी। चंदूलाल ने उसी वक्त फैसला किया कि वे अब असली के चक्कर में कभी नहीं पड़ेंगे, हमेशा नकली को ही सेलिब्रेट करेंगे। दुनिया में सब लोग नकली को ही सेलिब्रेट करते हैं। नकली दोस्ती, नकली चेहरे, नकली रिश्ते, नकली नेता, नकली माल हर जगह नकली ही तो चल रहा है। उन्होंने तय किया कि जैसा चल रहा है, वैसा चलता रहे तो ठीक है। असली के चक्कर में नकली पर भी आफत न आ जाए। इसके बाद चंदूलाल का मन-मिजाज अचानक हल्का हो गया और वे एक गाना गुनगुनाने लगे जिसके बोल थे- मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है।




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