आठ घंटे की ड्यूटी है
संपादक की झिड़की है
एचआर की फिरकी है
बंद पड़ी खिड़की है।
या फिर
सपनों की दुकान है
किराए का मकान है
दिन-रात की थकान है
फिर भी यह महान है।
सभी पत्रकारों को समर्पित
AI कोई धीमी आंधी नहीं है, यह एक ऐसा तूफ़ान है जो दुनिया के हर पेशे, हर दफ्तर और हर स्क्रीन को हिला रहा है। आज की सबसे ईमानदार सच्चाई यही है...
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