Friday, 13 June 2025

खबरों में कैसे शुरू हुआ फाइव डब्ल्यू और वन एच का इस्तेमाल

पत्रकारिता में हम जब भी खबर के इंट्रो यानी इंट्रोडक्शन की चर्चा करते हैं तब फाइव डब्ल्यू और वन एच के बारे में अवश्य बात करते हैं। पत्रकारिता में बच्चा-बच्चा जानता है कि यह क्या है। इसे हम छह ककार (कौन, क्या, कब, कहां, क्यों, कैसे) के नाम से भी जानते हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई इसी छह ककार से शुरू होती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि छह ककार का इस्तेमाल कब से शुरू हुआ और यह आया कहां से है। क्या आप यह जानते हैं कि पत्रकारिता में इसका इस्तेमाल शुरू होने से पहले भी समाज में इसका प्रचलन था। हम आज इस पर भी चर्चा करेंगे लेकिन इसके पहले हम पत्रकारिता में इसके इस्तेमाल पर ही फोकस करते हैं कि पत्रकारिता में इसका इस्तेमाल कब शुरू हुआ।

उपलब्ध जानकारियों के अनुसार फाइव डब्ल्यू और वन एच (5W1H) की अवधारणा का इतिहास काफी पुराना है और यह प्राचीन काल से ही विभिन्न रूपों में मौजूद रही है। ऐसा माना जाता है कि हिंदी पत्रकारिता में छह ककार का इस्तेमाल 20वीं शताब्दी के शुरुआती दौर में शुरू हुआ है जब समाचार पत्र संपादकों ने पत्रकारों को अच्छी तरह से खबरें लिखने में मदद करने के लिए इसका विकास किया था। एक जानकारी के अनुसार यह माना जाता है कि साल 1913 तक यह अखबारी पत्रकारिता का मानक बन गया था।

दरअसल फाइव डब्ल्यू और वन एच एक ढांचा या फार्मूला है जिसका उपयोग अक्सर खबरों में घटनाओं को अधिक स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। यह ढांचा विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को हल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस ढांचे को फाइव डब्ल्यू और वन एच या पांच डब्ल्यू और एक एच इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे इन छह प्रश्नों को शामिल किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पत्रकारों को इससे खबरें लिखने के लिए एक फार्मूला मिलता है। इस फार्मूले की मदद से वे खबरों के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर कर सकते हैं। इसकी जांच कर सकते हैं कि घटना के सभी प्वाइंट कवर हुए हैं या नहीं। इसलिए इसे पत्रकारिता के एक जरूरी औजार के रूप में भी रेखांकित किया जाता है। आइए समझते हैं कि पांच डब्ल्यू और एक एच के मायने क्या हैं‌। इसमें निम्न तत्व होते हैं -

क्या: क्या हुआ? घटना क्या थी?

कौन: घटना में कौन शामिल था?

कब: कब हुआ? घटना का समय क्या था?

कहां: कहां हुआ? घटना किस जगह हुई?

क्यों: क्यों हुआ? घटना का कारण क्या था?

कैसे: कैसे हुआ? घटना को कैसे अंजाम दिया गया? या घटना कैसे घटित हुई? 

किसी खबर के इंट्रो में इन सभी सवालों का जवाब जरूरी माना जाता है। माना जाता है कि इनको समाहित करने के बाद खबर पूरी तरह से परफेक्ट हो जाती है। 

इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक थ्योरी यह भी है कि फाइव डब्ल्यू और वन एच की अवधारणा का संबंध प्राचीन यूनानी सभ्यता से है। कहा जाता है कि इस अवधारणा की उत्पत्ति प्राचीन यूनानी दार्शनिक अरस्तू के कार्यों में मिलती है, जिन्होंने सात परिस्थितियों का उल्लेख किया था। इनमें कौन, क्या, कहां, कब, क्यों, कैसे और किसके द्वारा जैसे प्रश्न शामिल थे। बाद में इसे संचार और तर्कशास्त्र में लागू किया गया। यह माना जाता है इसमें से छह ककार लिए गए थे। 

छह ककार की अवधारणा का विकास जहां भी हुआ हो, जब भी हुआ हो, आज पत्रकारिता की दुनिया में इस फार्मूले की तूती बोलती है। हर पत्रकार, हर अखबार इस फार्मूले को अपना साथी मानता है और अपने झंडे गाड़ता है।













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