Saturday, 14 June 2025

जॉब में बने रहने के लिए हुनर सीखें, हुज्जत नहीं

हुनर और हुज्जत में बहुत फर्क है। दोनों के बीच कोई समानता नहीं है लेकिन जॉब के दौरान दोनों को सीखने के समान अवसर मिलते हैं। यह आप पर निर्भर है कि आप क्या सीखते हैं। आप जो भी सीखें लेकिन एक बार इनके बीच के फर्क पर जरूर गौर कर लीजिए।

हुनर और हुज्जत में पहला फर्क तो यह है कि हुनर को किसी से सीखना पड़ता है और हुज्जत करना अपने आप आ जाता है। इसे किसी से सीखने की जरूरत नहीं है।

दूसरा फर्क यह है कि हुनर से आपको कोई मुकाम हासिल हो सकता है, किसी चीज में सफलता हासिल हो सकती है और हुज्जत से मिल रहा कोई मुकाम हाथ से फिसल सकता है, सफलता की जगह निराशा मिल सकती है।

तीसरा फर्क यह है कि हुनर हासिल करने का काम नीरस लग सकता है, उबाऊ लग सकता है लेकिन हुज्जत में बहुत रस है, इसे करने में मज़ा बहुत आता है। लोग मजा ले-लेकर हुज्जत करते हैं, पानी पी-पीकर हुज्जत करते हैं। एक आदमी शुरू करता है तो पूरा मुहल्ला जमा हो जाता है क्योंकि हुज्जत संक्रमण की तरह फैलता है। 

यदि आप जॉब में हुज्जत करेंगे तो हुनर नहीं मिलेगा और यदि हुनर सीखना चाहते हैं तो हुज्जत से दूर रहना होगा।

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