इस जेनरेशन के दौरान हिंदी पत्रकारिता डिजिटल क्रांति, सोशल मीडिया के उभार और पारंपरिक मीडिया के रूपांतरण का गवाह बनी। इस युग में न सिर्फ पत्रकारिता बदली बल्कि पूरी दुनिया में बड़े-बड़े बदलाव हुए। यहां तक कि इंसानी प्रवृत्तियों में भी भारी बदलाव आने शुरू हो गए।
इस युग की पत्रकारिता की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं-
डिजिटल मीडिया का विस्फोट और ऑनलाइन पत्रकारिता
- जेनरेशन जी या जेनरेशन जेड के समय में इंटरनेट और स्मार्टफोन के प्रसार ने हिंदी पत्रकारिता को पूरी तरह बदल दिया। लगभग सभी दैनिक अखबारों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
- वायरल ख़बरों और क्लिकबेट हेडलाइंस का चलन बढ़ा, जिससे पत्रकारिता में सनसनीखे खबरों और उनके त्वरित प्रसार पर जोर बढ़ा।
सोशल मीडिया का प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता
- फेसबुक, ट्विटर (अब एक्स), और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स ने समाचारों के प्रसार को लोकतांत्रिक बनाया। आम लोगों ने भी घटनाओं की रिपोर्टिंग शुरू की, जिसे सिटिजन जर्नलिज्म कहा गया। लेकिन इनके कारण पत्रकारिता के मूल्यों का क्षरण भी शुरू हुआ। इन प्लेटफॉर्म पर बिना पुष्टि और स्रोत की खबरों का चलन भी बढ़ा जिससे अनेक तरह की दिक्कतें पेश आने लगीं। लोगों के मन में पत्रकारिता को लेकर संशय पैदा होने लगा। सदियों से चला आ रहा विश्वास डगमगाने लगा। हालांकि लाइव ब्लॉगिंग और रीयल-टाइम अपडेट्स ने खबरों की गति बढ़ाई, लेकिन इससे उत्पन्न फेक न्यूज़ की समस्या के कारण पत्रकारिता का बड़ा नुक़सान भी होने लगा।
विषयगत विविधता और युवा-केंद्रित कंटेंट
- जेन जेड की रुचियों को ध्यान में रखते हुए फैशन, टेक्नोलॉजी, मानसिक स्वास्थ्य, और पर्यावरण जैसे विषयों को प्रमुखता मिली। पत्रकारिता में अनेक नवीन क्षेत्रों का विकास होने लगा। लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य से जुड़ी सामग्रियों के लिए नया पाठक वर्ग भी पैदा हुआ और नए लेखक भी।
- इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स ने पारंपरिक पत्रकारों की भूमिका को चुनौती दी लेकिन पत्रकारिता में अराजकता भी पैदा हुई। जैसे-जैसे इनका प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पत्रकारिता पर सवाल भी बढ़ रहे हैं।
इंटरएक्टिव और मल्टीमीडिया पत्रकारिता
- वीडियो न्यूज, पॉडकास्ट्स, और इंफोग्राफिक्स का उपयोग बढ़ा, जिससे समाचारों को समझना आसान हुआ।
- मीम्स और हास्य वीडियोज के जरिए भी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाया जाने लगा यानी अभिव्यक्ति के नए-नए तरीके बने।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि जेन जी यानी जेनरेशन जेड के दौर में हिंदी पत्रकारिता ने गति और पहुंच के मामले में अभूतपूर्व प्रगति की, लेकिन यह प्रगति इसने खबरों की विश्वसनीयता और गहन विश्लेषण की कीमत पर भी की। यह युग डिजिटल मीडिया के स्वर्णिम अवसरों और उसकी जटिल चुनौतियों का प्रतीक है। लेकिन क्लिकबेट जर्नलिज्म, फेक न्यूज़ और पेड न्यूज के कारण पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल उठे। एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह (Algorithmic Bias) के चलते समाचारों का चयन पाठकों की पसंद के अनुसार होने लगा। इसका सबसे बड़ा नुक़सान यह हुआ कि खबरों में संतुलित दृष्टिकोण कमजोर होने लगा। शक्तिशाली लोगों, संस्थाओं की पसंद और नापसंद के हिसाब से खबरें मैनिपुलेट होने लगीं और उदंत मार्तण्ड के काल से विकसित हो रही पत्रकारिता की नैतिकता और चरित्र नष्ट होने लगा।
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