इस समय पत्रकारिता में जेनरेशन मिलेनियल्स, जेड और अल्फा का दौर चल रहा है। जेनरेशन जेड अभी पत्रकारिता में कमान संभाल रही है। इनके साथ जेनरेशन मिलेनियल्स भी है। ये दोनों जेनरेशन पत्रकारिता को किस तरह संचालित कर रहे हैं। इनके समय की पत्रकारिता पुराने समय की पत्रकारिता से कितनी अलग है। पुराने समय की पत्रकारिता में आज क्या-क्या बदलाव आया है। इसे समझना दिलचस्प होगा। आइए इसे समझते हैं -
1. माध्यम और प्रौद्योगिकी
पुरानी पीढ़ी-पत्रकारिता का इतिहास प्रौद्योगिकी के विकास के साथ शुरू हुआ। भारत में पहला समाचार-पत्र 1776 में विलेम बॉल्ट्स द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ, जो ईस्ट इंडिया कंपनी के समाचारों पर केंद्रित था। 1819 में बंगाली भाषा में "संवाद कौमुदी" राजा राममोहन राय द्वारा प्रकाशित हुआ, जो भारतीय भाषा का पहला समाचार-पत्र था। प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत 1674 में हुई, लेकिन समाचार-पत्रों का वास्तविक विकास 19वीं सदी में हुआ। ये पत्र प्रायः सामाजिक सुधार और नए ज्ञान के प्रसार पर केंद्रित थे, लेकिन सीमित तकनीक के कारण धीमे और स्थानीय थे। इनमें मूल उद्देश्य गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करना था।
नई पीढ़ी-डिजिटल क्रांति ने पत्रकारिता को बदल दिया। इंटरनेट, सोशल मीडिया (ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब), और मोबाइल ऐप्स ने खबरों को त्वरित और वैश्विक बना दिया। आज, समाचार वेबसाइट्स, ब्लॉग्स, और पॉडकास्ट जैसे माध्यमों ने पारंपरिक प्रिंट और टीवी को पीछे छोड़ दिया है। रीयल-टाइम अपडेट और मल्टीमीडिया कंटेंट (वीडियो, इन्फोग्राफिक्स) अब आम हैं।
2. सामग्री की गति और गुणवत्ता
पुरानी पीढ़ी-समाचार-पत्रों का प्रकाशन दैनिक, साप्ताहिक या मासिक होता था, जिसके कारण खबरों में गहराई और तथ्य-जांच पर जोर था। उदाहरण के लिए, 1830 में राममोहन राय का "बंगदूत" हिंदी, बंगला, अंग्रेजी और फारसी में निकलता था, जो सामाजिक सुधारों पर केंद्रित था।
नई पीढ़ी- 24/7 न्यूज़ साइकिल के कारण खबरों को तुरंत प्रकाशित करने का दबाव है। इससे कभी-कभी सनसनीखेजी और क्लिकबेट की प्रवृत्ति बढ़ी है। हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने डेटा पत्रकारिता और इंटरैक्टिव स्टोरीटेलिंग को बढ़ावा दिया है, जो पाठकों को गहन विश्लेषण प्रदान करता है।
3. पत्रकार की भूमिका और प्रशिक्षण
पुरानी पीढ़ी: पत्रकार मुख्य रूप से लेखक या संवाददाता होते थे, जिनका काम खबर इकट्ठा करना और लिखना था। संपादकीय नियंत्रण सख्त था, और पत्रकारों को औपचारिक प्रशिक्षण की कम आवश्यकता थी।
नई पीढ़ी: पत्रकार अब मल्टी-टास्किंग करते हैं—लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग, और सोशल मीडिया मैनेजमेंट। डिजिटल टूल्स जैसे SEO, डेटा एनालिटिक्स, और कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) का ज्ञान आवश्यक है। फ्रीलांसिंग और स्वतंत्र पत्रकारिता का चलन बढ़ा है।
4. दर्शकों से जुड़ाव
पुरानी पीढ़ी: पाठकों से संवाद सीमित था, जो पत्रों या टेलीफोन के माध्यम से होता था। समाचार-पत्रों का प्रभाव स्थानीय या क्षेत्रीय था।
नई पीढ़ी: सोशल मीडिया ने दर्शकों से सीधा और त्वरित संवाद संभव बनाया। पाठकों की टिप्पणियां, लाइक्स, और शेयर सीधे कंटेंट को प्रभावित करते हैं। पत्रकार अब दर्शकों की रुचियों को एनालिटिक्स के जरिए समझते हैं और उसी के अनुसार सामग्री बनाते हैं।
5. आर्थिक मॉडल
पुरानी पीढ़ी: समाचार-पत्रों की आय का मुख्य स्रोत विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन था। बड़े मीडिया हाउस का दबदबा था, और छोटे प्रकाशनों का जीवित रहना मुश्किल था।
नई पीढ़ी: डिजिटल विज्ञापन, पे-वॉल, क्राउडफंडिंग, और स्पॉन्सर्ड कंटेंट नए आय के स्रोत हैं। स्वतंत्र पत्रकार और छोटे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भी अब प्रतिस्पर्धा में हैं। हालांकि, विज्ञापन-निर्भर मॉडल के कारण क्लिकबेट और सनसनीखेज सामग्री की समस्या बढ़ी है।
6. विश्वसनीयता और नैतिकता
पुरानी पीढ़ी: पत्रकारिता में नैतिक मानदंड और तथ्य-जांच पर सख्ती थी। समाचार-पत्र सामाजिक सुधार और जागरूकता पर केंद्रित थे, लेकिन सरकारी सेंसरशिप और नियंत्रण की चुनौतियाँ थीं।
नई पीढ़ी: फेक न्यूज़, गलत सूचना, और पक्षपातपूर्ण कवरेज की चुनौतियां बढ़ी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट ने विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तथ्य-जांच और पारदर्शिता पर जोर दे रहे हैं।
7. वैश्वीकरण और पहुंच
पुरानी पीढ़ी: समाचार-पत्रों की पहुंच स्थानीय या राष्ट्रीय थी। भाषा की समस्या भी थी, जैसे कि शुद्ध हिंदी बनाम सुलभ भाषा का चयन।
नई पीढ़ी: इंटरनेट ने पत्रकारिता को वैश्विक बना दिया। एक खबर सेकंडों में दुनिया भर में फैल सकती है। मल्टीलिंग्वल कंटेंट और ऑटोमेटेड ट्रांसलेशन ने भाषा की बाधाओं को कम किया है।
8. सामाजिक प्रभाव और उद्देश्य
पुरानी पीढ़ी: पत्रकारिता का उद्देश्य सामाजिक सुधार, स्वतंत्रता संग्राम, और जनजागरूकता था। उदाहरण के लिए, "बंगदूत" जैसे पत्रों ने हिंदी को महत्व दिया और सामाजिक बदलाव की वकालत की।
नई पीढ़ी: पत्रकारिता अब मनोरंजन, शिक्षा, और सामाजिक बदलाव का मिश्रण है। डिजिटल युग में व्यक्तिगत कहानियों, नागरिक पत्रकारिता, और वायरल ट्रेंड्स का प्रभाव बढ़ा है।
इस तरह से हम कह सकते हैं कि पुरानी पत्रकारिता गहन, सुधार-उन्मुख, और सीमित दायरे वाली थी, जबकि नई पत्रकारिता तेज, तकनीक-प्रधान, और वैश्विक है। पुरानी पीढ़ी ने सामाजिक सुधारों को प्राथमिकता दी, वहीं नई पीढ़ी में गति और पहुंच के साथ-साथ विश्वसनीयता की चुनौतियां हैं। दोनों के बीच संतुलन बनाना आधुनिक पत्रकारिता की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
(उपरोक्त जानकारी वेब पर उपलब्ध सामग्री, विशेष रूप से पत्रकारिता के इतिहास से संबंधित स्रोतों पर आधारित है।)