तस्वीर में जिस महल के खंभे पर मैं पैर टिकाकर खड़ा हूं, वहां तक पहुंचने के लिए अंग्रेजों को चार युद्ध (मैसूर-एंग्लो) लड़ने पड़े थे। मैसूर के राजा टीपू सुल्तान को हराने में अंग्रेजों की सांसें फूल गई थीं। टीपू सुल्तान की मृत्यु 1799 में अंग्रेजों के साथ साइरिंगपट्टना की चौथी लड़ाई में हुई। उनके बाद मैसूर राज्य की सत्ता ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ में आ गई। टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने वोडेयार वंश को फिर से सत्ता में स्थापित किया, जिन्हें टीपू सुल्तान और हैदर अली ने पहले अपदस्थ कर दिया था।
जब आप इस दो मंजिले महल में प्रवेश करेंगे तो आपको चारों ओर खूबसूरत नक्काशी वाले खंभे दिखाई देंगे। इन्हीं खंभों पर यह महल टिका है। खंभों की विशेषता यह है कि यह ऊपर से नीचे की ओर जाते हैं। दोनों मंजिलों को यह जोड़ते हैं। नीचे लंबा सा हॉल है। शायद यहां राजा का दरबार लगता हो। हॉल के छोर पर ऊपर जाने की सीढ़ियां बनी हुई हैं। सीढ़ियों से चढ़कर ऊपर जाएंगे तो हॉल दिखेगा। हॉल के दोनों छोर पर कमरे बने हैं। बताया जाता है कि यहां राजा का निजी कक्ष था। ऊपरी मंज़िल में छज्जे और बॉलकोनी बने हैं, जहां से राजा दरबार की गतिविधियां देखते थे। पूरा महल लकड़ी (टीक वुड) से बना है। इसमें नक्काशीदार खंभे, झरोखे हैं। महल की दीवारों और छतों पर रंगीन चित्रकारी, फूलों की बेल-बूटियां और ज्यामितीय डिज़ाइन हैं।
महल में प्रवेश करते ही इसकी खूबसूरती का अंदाज मिलने लगता है। हालांकि अब खूबसूरती की चमक घटती जा रही है। इसके बावजूद अपनी भव्यता का अहसास कराने के लिए काफी है। महल के अंदरूनी हिस्से में रोशनी की थोड़ी कमी महसूस होती है लेकिन आपको इसकी कमी अखरेगी नहीं। हम जब पहुंचे तब एक-दो जोड़े वहां पहले से ही मौजूद थे और अपने पार्टनर की तस्वीरें खींचने में व्यस्त थे। महल के झरोखे के बीच खड़े होकर तस्वीरें खिंचवाने का मन आपका भी हो जाएगा। झरोखे से झांकती तस्वीरें आपका मन मोह लेंगी।
महल में नीचे एक बड़ा सा आंगन भी है। कहते हैं राजा इस आंगन में अपने अतिथियों के साथ मुलाकात करते थे। यहां टीपू सुल्तान की जनता से भेंट और दैनिक प्रशासन के कार्य भी होते थे। इस हिस्से में एक छोटा संग्रहालय बनाया गया है, जहां टीपू सुल्तान की वस्तुएं रखी हैं। इन वस्तुओं में एक तलवार की अनुकृति (असली लंदन के संग्रहालय में है), राजकीय पोशाक, युद्ध में प्रयुक्त चीजें, ब्रिटिश हुकूमत के साथ हुए युद्धों में उपयोग की गई कुछ चीजें शामिल हैं।
टीपू सुल्तान का समर पैलेस बेंगलुरु का एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह महल 18वीं शताब्दी में बना था और यह टीपू सुल्तान की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में कार्य करता था। हैदर अली ने इसका निर्माण वर्ष 1761 में शुरू किया था लेकिन इसे 1791 में टीपू सुल्तान ने पूरा कराया। इसकी वास्तुकला शैली इंडो-इस्लामिक और द्रविड़ का मिश्रण है।

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