Saturday, 5 July 2025

मन को वहां न बांधिए जहां न मिलती प्रीत

अगर इस पंक्ति को पत्रकारिता में फिट करें तो इसका अर्थ यह होगा कि जिस संस्थान में मान-सम्मान, स्नेह, प्रेम नहीं मिलता है, उस संस्थान में अपना मन मत खोलिए यानी कतई काम मत कीजिए। ऐसे संस्थान को फौरन छोड़ दीजिए। पत्रकारिता में आप मान-सम्मान के लिए ही आएं हैं और यदि वही नहीं मिल रहा है तो फिर क्या फायदा। 

लेकिन क्या ऐसा करना आप अफोर्ड कर पाएंगे क्योंकि अखबारों में वैसे भी नौकरियां मुश्किल से मिलती हैं। ऐसे में लगी-लगाई नौकरी कौन छोड़ेगा। इसका जवाब यह है कि आप बिल्कुल ऐसा करना अफोर्ड कर पाएंगे यदि आपके अंदर हुनर और काबिलियत है तो। आपके अंदर कौन से हुनर होने चाहिए। इस पर भी एक नज़र मार लेते हैं। 

👉 खबरों की समझ- पत्रकारिता के लिए यह सबसे बड़ा हुनर है। खबरों को समझना और महत्व के हिसाब से उसे लिखना या पेज पर उसे डिस्प्ले करना सबसे बड़ा हुनर है। जिस भी पत्रकार के पास यह हुनर होता है, अखबार उसे हर हाल में अपने दफ्तर में रखना चाहेगा। 

👉 खोजने की ललक - यदि आपके अंदर खोजने की ललक है। हर रोज नए-नए तथ्यों को तलाशने का जुनून है और इन्हें नए-नए अंदाज में परोसने का हुनर है तो फिर आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। ऐसे पत्रकारों को अपनी कद्र खुद करनी चाहिए क्योंकि पत्रकारिता में ऐसे लोगों की कमी होती जा रही है। इसलिए कोई भी संस्थान आप जैसे पत्रकार को अपने पास हमेशा के लिए रखना चाहेगा।

👉 सवाल उठाने की कला - यह गुण हर पत्रकार में नहीं होता है। हर पत्रकार भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़ा होकर सवाल पूछने का साहस नहीं कर सकता है। लेकिन जो भी ऐसा साहस दिखाता है, उसे ही नई चीज मिल पाती है और उसका ही नाम लिया जाता है। यदि आपके पास यह गुण है तो आपको चिंता नहीं करनी चाहिए। 

👉 भाषा की ताकत - अच्छी और मजबूत भाषा हर पत्रकार की बड़ी ताकत होती है। भाषा के बल पर ही पत्रकार अपनी धाक जमा सकता है। जिस भी पत्रकार के पास शुद्ध और प्रभावशाली भाषा है, उसे पत्रकारिता में हमेशा इज़्ज़त मिलती है। इसलिए यदि आपके पास भी ऐसी भाषा है तो आप निश्चिंत होकर अपना फैसला लीजिए। आप कभी भी बेरोजगार नहीं रहेंगे।

👉 तकनीक से ताल्लुक - यह जमाना तकनीक का है। अब हर काम तकनीकी हुनर से होता है। इसलिए हर पत्रकार को खुद को हमेशा नई-नई तकनीक से लैस करते रहना चाहिए। यदि आपने खुद को तकनीक के क्षेत्र में माहिर बना लिया है तो आप बेफिक्र होकर अपने मान-सम्मान की रक्षा कर सकते हैं और यदि मान-सम्मान नहीं मिल रहा हो बेझिझक होकर उस जगह को छोड़ सकते हैं। कोई भी दूसरा संस्थान आपको नौकरी देने से पीछे नहीं हटेगा।

तो आपके अंदर उपरोक्त काबिलियत हैं तो आपको अपने मान-सम्मान की रक्षा करनी चाहिए और यदि ये काबिलियत आपके अंदर नहीं हैं तो इन्हें हासिल करने की शुरुआत आज से ही कर दीजिए। पत्रकारिता खासकर हिंदी पत्रकारिता में हुनरमंद लोगों की कमी होती जा रही है। संस्थान को जरूरत होती है दस योग्य पत्रकारों की तो मिलते हैं दो योग्य लोग। इसलिए पत्रकारिता में अपनी धमक बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज है खुद को काबिल बनाना। जिस दिन आप हर तरह से काबिल हो जाएंगे, यकीन मानिए उस दिन अखबार वाले आपको बुलाकर नौकरी देंगे। फिर तब आपको टॉक्सिक माहौल वाले संस्थान में रहने की जरूरत ही नहीं होगी। 


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