Thursday, 24 July 2025

पत्रकारिता के सात टोटके से कभी न भटकें

टोटका शब्द से हम सभी परिचित हैं। परिवार में दादी-नानी या मां ने कभी न कभी कोई न कोई टोटका हम सबों के साथ किया ही होगा। नज़र न लगने, नजर उतारने, यात्रा शुभ होने के टोटके आम हैं। इसी तरह पत्रकारिता में भी कुछ टोटके हो सकते हैं जिन्हें हम करके यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारी पत्रकारिता को किसी की नजर न लगे यानी हम जो खबर लिखें, वह परफेक्ट हो और अपने उद्देश्य को पूरा करती हो। 
हिंदी पत्रकारिता में टोटके का तात्पर्य उन छोटे-छोटे उपायों, तकनीकों या रणनीतियों से हो सकता है, जो पत्रकार अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने, खबरों को प्रभावी बनाने, या पाठकों/दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपनाते हैं। ये टोटके पत्रकारिता के क्षेत्र में अनुभव, रचनात्मकता और संवेदनशीलता से विकसित होते हैं। नीचे कुछ सामान्य और प्रभावी टोटके दिए गए हैं, जो हिंदी पत्रकारिता में उपयोगी हो सकते हैं-
1️⃣ आकर्षक शीर्षक और प्रस्तुति
टोटका यह है कि हर खबर का शीर्षक छोटा, रोचक और उत्सुकता जगाने वाला हो। भावनात्मक या स्थानीय शब्दों का उपयोग करना अच्छा होता है, जैसे नया खुलासा या आपके शहर की अनसुनी कहानी।
उदाहरण- क्या आप जानते हैं आपके शहर का यह राज? इससे पाठकों  में जिज्ञासा बढ़ेगी।
इसका लाभ यह है कि यह पाठकों को तुरंत आकर्षित करता है और खबर पढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
2️⃣ स्थानीयता पर जोर
टोटका है कि खबर को स्थानीय संदर्भ से जोड़ें। स्थानीय मुद्दों, संस्कृति और बोली का उपयोग पाठकों से गहरा जुड़ाव बनाता है।
उदाहरण- किसी राष्ट्रीय नीति की खबर को स्थानीय स्तर पर प्रभाव से जोड़कर लिखने से पाठकों का जुड़ाव बढ़ता है, जैसे नई शिक्षा नीति- आपके बच्चे के स्कूल पर क्या असर?
इसका फायदा यह होगा कि पाठक खबर को अपने जीवन से जोड़कर देखेंगे। 
3️⃣ सहज भाषा का उपयोग
टोटका यह है कि जटिल शब्दों की बजाय सरल, बोलचाल के शब्दों का उपयोग करें। स्थानीय कहावतें, मुहावरे या लोकप्रिय संदर्भ भी जोड़ सकते हैं।
उदाहरण- यह योजना गांव के लिए गेम-चेंजर साबित होगी या जैसे पानी में पत्थर फेंकने से लहरें उठती हैं, वैसे ही इस खबर ने हलचल मचा दी।
इससे सामान्य पाठक को खबर समझने में आसानी होगी।
4️⃣ विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग
टोटका यह है कि खबर की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए स्थानीय लोगों, विशेषज्ञों या अधिकारियों के बयान शामिल करें। बिना स्रोत के कोई खबर नहीं लिखें। यदि सरकारी विज्ञप्ति से खबर बना रहे हैं तो उसका भी उल्लेख करना चाहिए। फलां अधिकारी का कहना है" जैसे वाक्य विश्वास जगाते हैं लेकिन ऐसा कहा जाता है जैसे वाक्य विश्वास घटाते हैं।
उदाहरण- जिलाधिकारी ने बताया कि बाजार में यह बदलाव व्यापारियों के लिए फायदेमंद है।
लाभ यह होगा कि इससे पाठक खबर पर भरोसा करेंगे। साथ ही अखबार और पत्रकार की विश्वसनीयता बढ़ती है।
5️⃣ पत्रकारिता में समय प्रबंधन
टोटका यह है कि अखबार को समय पर छोड़ने के लिए समय पर खबर फाइल करना जरूरी होता है। इसके लिए दिन की शुरुआत में प्राथमिकता तय करें। महत्वपूर्ण खबरों के लिए पहले स्थानीय स्रोतों से संपर्क करें। 
उदाहरण-दिन के फर्स्ट हाफ में खबरों को बटोरने का काम करें ताकि दोपहर बाद खबरें तैयार हो जाएं।
इसका लाभ यह होगा कि समय पर अखबार छपेगा और समय पर पाठकों के हाथ में पहुंचेगा। इससे अखबार की विश्वसनीयता और प्रभाव बढ़ता है।
6️⃣ नैतिकता और संवेदनशीलता
टोटका यह है कि संवेदनशील मुद्दों पर खबर लिखते समय सावधान रहना चाहिए। स्थानीय और राष्ट्रीय भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए और तथ्यों को सावधानी से प्रस्तुत करना चाहिए। संवेदनशील मुद्दों को लेकर लापरवाह रवैया कभी नहीं अपनाना चाहिए। 
उदाहरण-किसी दुर्घटना की खबर में पीड़ितों के परिवार की निजता का सम्मान करें।
इसका लाभ यह होगा कि इससे पत्रकार और संस्थान दोनों की साख को बनी रहेगी।
7️⃣ पाठक की रुचि का ध्यान
टोटका यह है कि घटनात्मक खबरों के अलावा ऐसी खबरें चुननी चाहिए जो हिंदी भाषी पाठकों के लिए प्रासंगिक हों, जैसे शिक्षा, रोजगार, कृषि, या त्योहार।
उदाहरण-'दिवाली से पहले बाजार में नकली मिठाइयों का खतरा' जैसी खबरें पाठकों को आकर्षित करती हैं। हालांकि ऐसी खबरें हर साल छपती हैं लेकिन हर साल लोग इसे पढ़ते भी हैं। साथ ही पत्रकारों का फर्ज है कि अपने पाठकों को ऐसे खतरों से आगाह करे। 
इससे पाठकों का जुड़ाव और अखबार/चैनल की लोकप्रियता बढ़ती है।
सावधानी 
पत्रकारिता में टोटके रचनात्मक तकनीकें हैं, लेकिन इन्हें अंधविश्वास या गलत सूचनाओं से जोड़ने से बचें। साथ ही हमेशा पत्रकारिता के नैतिक मानदंडों का पालन करें।




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