दुनिया आपको क्यों पहचानती है क्योंकि आपका एक नाम और एक चेहरा है। हो सकता है आपके नाम वाले कई व्यक्ति हों लेकिन आपका चेहरा सिर्फ आपका है। यह किसी और का नहीं हो सकता है। ठीक इसी तरह हर अखबार का एक नाम और एक चेहरा होता है और इसी चेहरे को मास्टहेड कहते हैं जिस पर अखबार का नाम लिखा होता है। किसी एक अखबार का मास्डहेड दूसरे के जैसा नहीं हो सकता है। इसलिए आप अखबारों की भीड़ में दबे हुए अपने पसंदीदा अखबार की एक छोटी सी झलक देखकर भी उसको पहचान लेते हैं। यह मास्डहेड की खूबी और ताकत है। इसलिए मास्टहेड में जल्दी बदलाव नहीं किया जाता है क्योंकि यह किसी अखबार के ब्रांड की पहचान है और यह पहचान एक दिन में नहीं बनती है। इसे बनाने में दशकों का समय लगता है। यही पहचान पाठकों की पीढ़ी दर पीढ़ी को ट्रांसफर होती रहती है और अखबार को जीवित रखती है।
कहां होता है मास्टहेड
मास्टहेड को सामान्य भाषा में नेमप्लेट या नाम पट्टी भी कह सकते हैं। यह अखबार के पहले पन्ने के टॉप में चौड़ी पट्टी की तरह होता है। यह पहले पन्ने पर होता है, इसलिए मास्टहेड कहलाता है।
इसमें क्या लिखा होता है
इसमें लिखी गई हर जानकारी महत्वपूर्ण है। सबसे बड़े प्वाइंट में अखबार का नाम लिखा जाता है। नाम लिखने की स्टाइल हर अखबार में अलग-अलग होती है और यही स्टाइल अखबार को एक अलग पहचान देती है। इसमें खास बात यह है कि यह स्टाइल कभी भी बदली नहीं जाती है। यह सदियों तक एक जैसी ही होती है। यदि आप किसी भी पुराने अखबार को देखेंगे तो दशकों पुरानी स्टाइल आज भी चल रही है।
नाम के अलावा जिस दिन का अखबार है, वह तारीख, दिन, प्रकाशन वाले शहर का नाम लिखा होता है। साथ ही हिन्दी तिथि भी लिखी जाती है। पृष्ठ संख्या और संस्करण की जानकारी भी होती है। कुछ अखबार अंदर के पेजों की महत्वपूर्ण खबरों की सचित्र टीजर भी इस पर देते हैं। मास्टहेड के दोनों साइड के हिस्से को ईयर पैनल कहते हैं। पुराने समय में दोनों पैनल पर विज्ञापन छापे जाते थे लेकिन अब यहां तस्वीर के साथ खबरों की हेडिंग लगाई जाती है।
मास्टहेड का उद्देश्य पाठकों को प्रकाशन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना होता है।
कुछ अखबारों अंदर के पेजों खासकर लोकल पेज पर भी मास्टहेड जैसी चौड़ी पट्टी में अखबार का नाम लगाते हैं। इसे भी मास्टहेड कहते हैं लेकिन इसके ऊपर जानकारियां पहले पेज जैसी नहीं होती है।
क्या होता है फोलियो
फोलियो अखबार के हर पन्ने के टॉप में लगी पतली सी पट्टी है। इस पट्टी के बीचोंबीच बड़े अक्षरों में पेज का नाम लिखा होता है। पेज के नाम पेज पर लगी खबरों के अनुसार होते हैं। जैसे, दिल्ली के लोकल पेजों पर दिल्ली, अपनी दिल्ली या इसी तरह का कोई नाम हो सकता है। यदि पूरे राज्य की खबरों का पन्ना है तो इसका नाम प्रादेशिक हो सकता है। इसी तरह हर पेज पर लगाई गई खबरों के हिसाब से नाम रखा जाता है। इस मामले में हर अखबार अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से नाम रखने के लिए स्वतंत्र हैं। पट्टी की एक तरफ अखबार का नाम, जगह का नाम, तारीख और दिन लिखा जाता है। आजकल दूसरी तरफ अखबार के वेबसाइट का एड्रेस लिखने का चलन है।
खेल, कारोबार और संपादकीय पेजों पर विशेष तरह के फोलियो लगाने का चलन भी है। किसी खास मौके पर विशेष फोलियो बनाया जाता है। जैसे अभी ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगभग सभी अखबारों में विशेष पेज छपते रहे हैं। इन पेजों पर अलग-अलग तरीके के फोलियो लगाए गए। ऐसे फोलियो की चौड़ाई सामान्य से ज्यादा हो सकती है, होती है। इसके नाम भी अलग-अलग रखे जाते हैं।
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