Sunday, 22 June 2025

पत्रकारिता के छात्र सबसे पहले हिंदी सुधारें

मुझे लगातार पत्रकारिता के छात्रों के सवाल मिल रहे हैं। इनमें पत्रकारिता में करियर से जुड़े अनेक तरह के सवाल होते हैं। मैं सवालों के जवाब देने का भरसक प्रयास करता हूं। इस क्रम में मैंने एक गंभीर बात नोटिस की है कि मुझसे सवाल पूछने वाले छात्रों में दस में से आठ छात्र शुद्ध हिन्दी नहीं लिख पाते हैं। किसी में लिंग दोष होता है तो किसी में वर्तनी की गड़बड़ी। यहां तक कि वाक्य विन्यास भी गड़बड़ होता है। यदि आप चार पंक्तियों के सवाल में भी हिंदी शुद्ध नहीं लिख पा रहे हैं तो यह एक गंभीर बात है क्योंकि पत्रकारिता में भाषा का शुद्ध होना पहली शर्त है। पत्रकारिता के क्षेत्र में भाषा सबसे जरूरी हथियार है जिसके बल पर आप करियर में बुलंदी हासिल कर सकते हैं। यदि यह हथियार कमजोर है तो फिर जंग कैसे लड़ेंगे? दिक्कत यह है कि भाषा को शुद्ध लिखने की पढ़ाई न तो पत्रकारिता संस्थान में पढ़ाई जाती है और न ही मीडिया संस्थान में। यह हुनर आपको खुद सीखना होगा और यदि आप यह हुनर नहीं हासिल कर पाते हैं तो मेरी सलाह होगी कि आप अपना प्रोफेशन बदल लें। पत्रकारिता में बिना अच्छी भाषा के आप ज्यादा ऊंचाई हासिल नहीं कर पाएंगे। कुछ साल बाद जब आपको करियर में अपेक्षित ग्रोथ नहीं मिल पाएगा तो आप पत्रकारिता को कोसेंगे। इससे अच्छा है कि समय रहते फैसला कर लें कि आपको क्या करना है। यदि आप पत्रकारिता छोड़ने का फैसला नहीं करते हैं तो सबसे पहले आपको अपनी भाषा सुधारने का प्रयास शुरू करना चाहिए। यह एक दिन में नहीं होगा। इसके लिए सतत् स्वाध्याय, मेहनत और लगन की जरूरत होती है। आपको लंबे समय की इस मेहनत के लिए खुद को तैयार करना चाहिए क्योंकि इसका कोई शॉर्टकट नहीं है।

आप यदि इस कठोर परिश्रम के लिए तैयार हैं तो आपको अनुशासित ढंग से इस पर क्रमवार आगे बढ़ना होगा। यह काम आप किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करें तो अच्छा रहेगा। इसके लिए आपको लंबे समय तक गाइडेंस की जरूरत पड़ेगी। 

अभी के लिए इतना बता दूं कि अच्छी भाषा के बिना पत्रकारिता में आपका करियर बुलंदी तक पहुंच पाएगा, इसमें संदेह है क्योंकि हर हिंदी अखबार को शुद्ध और अच्छी हिंदी लिखने वालों की ही जरूरत होती है।

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