Wednesday, 18 June 2025

नौकरी में सर्वाइवल ट्रिक

एक समय था जब पत्रकारिता में दुर्व्यवहार या अपमान जैसी हरकतें लगभग शून्य थी। उस समय पत्रकारिता का क्षेत्र दंभ नहीं गौरव से भरा होता था क्योंकि उस समय के पत्रकारों के पास अपने उसूल और मार्गदर्शन हुआ करते थे। इसलिए सीखने और सिखाने का समृद्ध माहौल था जिसमें भाईचारे का जबरदस्त तड़का लगता रहता था। लेकिन आज स्थितियां उल्ट गई हैं। आज पत्रकारिता में भी पद के साथ दंभ और घमंड जैसे गुण अपने आप आ जाते हैं और छोटा-सा इंचार्ज भी खुद को तोप समझने लगता है। फिर शुरू हो जाता है अपने मातहतों के साथ दुर्व्यवहार का सिलसिला। यदि आपका इंचार्ज भी आपके साथ दुर्व्यवहार या ग़लत व्यवहार करता है, बात-बात पर चीखता-चिल्लाता है तो आप इससे बचने के लिए एक उपाय कर सकते हैं।

उपाय यह है कि अगली बार जब आपका इंचार्ज गुस्से में आपको बुरा-भला कहे तो आप किसी तरह उसकी तस्वीर खींच लो या उस घटना का वीडियो बना लो। फिर जब उसका गुस्सा ठंडा पड़ जाए तो इंचार्ज को एकांत में ले जाकर वह वीडियो दिखा दो। फिर शांत भाव से बोलो- यह वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत सारे लाइक्स बटोरेगा। सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े कांड होते रहते हैं। आप भी छोटा सा कांड कीजिएगा तो क्या बिगड़ जाएगा। वीडियो देखकर आपके इंचार्ज के संभल जाने के पूरे चांस हैं। फिर वह आपके साथ दुर्व्यवहार करना बंद कर देगा। वैसे इस कांड के बूमरैंग करने का खतरा भी है। 

हां, यह टेंशन मत लेना कि ऐसा करना ब्लैकमेलिंग है। यह ब्लैकमेलिंग कतई नहीं कहलाएगा क्योंकि यह सर्वाइवल ट्रिक है, ब्लैकमेलिंग नहीं। जिंदा रहने का हर व्यक्ति को अधिकार है। आखिर हर किसी को अपनी रक्षा करने का कानूनी हक मिला हुआ है। 

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