Saturday, 24 May 2025

हिंदी अखबारों में पत्रकारों के लिए कैसे होता है इंटरव्यू

हिंदी अखबारों में ट्रेनी से लेकर स्थानीय संपादक तक के पदों के लिए इंटरव्यू के लिए खुद को तैयार करना भी एक कला है। हिंदी के पत्रकारों को यह जानना चाहिए कि किस पद के लिए किस तरह का इंटरव्यू होता है। हालांकि अलग-अलग अखबार अपने-अपने अंदाज में इंटरव्यू करते हैं लेकिन हर अखबार का प्रबंधन मोटे तौर पर कैंडिडेट्स के अंदर कुछ बेसिक गुणों को परखना चाहता है। यह बात भी समझना चाहिए कि ये गुण पदों के हिसाब से बदल जाते हैं। यानी एक ट्रेनी में अलग गुणों की तलाश की जाती है तो जूनियर सब एडिटर/रिपोर्टर में कुछ अलग। यह स्वाभाविक है क्योंकि पदों के हिसाब से जिम्मेदारियां बदल जाती हैं तो गुण भी अलग-अलग होने चाहिए। 

आज हम इस बात को समझने की कोशिश करते हैं कि अखबारों का प्रबंधन किस पद के कैंडिडेट में किस तरह के गुणों की तलाश करता है। यहां एक बात ध्यान में रखना चाहिए कि इंटरव्यू तभी होता है जब कैंडिडेट्स लिखित परीक्षा में पास हो चुका होता है। लिखित परीक्षा में ट्रेनी से लेकर ऊपर के पदों के लिए तीन चीजों की जांच की जाती है। ये तीन चीजें हैं -

*️⃣ शुद्ध हिन्दी लिखने की क्षमता 

*️⃣ अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद की क्षमता 

*️⃣ सामान्य ज्ञान 

इन तीन टेस्ट में कैंडिडेट्स को कम से कम 60 फीसदी अंक प्राप्त होने के बाद ही उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखना चाहिए कि समाचार संपादक और स्थानीय संपादक के पद के लिए लिखित परीक्षा नहीं ली जाती है। इस पद के कैंडिडेट को सीधे इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। तो चलिए शुरू करते हैं-

1️⃣ ट्रेनी जर्नलिस्ट 

यह अखबारों में पहला पायदान है। इसलिए इसके इंटरव्यू में कैंडिडेट्स का रुख, रूझान और प्रवृत्ति को समझने का प्रयास किया जाता है। यह भी परखा जाता है कि इसके अंदर सीखने और अनुशासित रहने की क्षमता कितनी है। इसके जीवन में कोई लक्ष्य है या नहीं। इसकी सोच में सकारात्मक तत्व हैं या नहीं। 

2️⃣ जूनियर सब एडिटर/रिपोर्टर 

अखबारों में जिम्मेदारी उठाने वाला यह पहला पद है। इसे काम करना होता है तो इस पद के कैंडिडेट के अंदर काम करने की ललक और उत्साह को सबसे ज्यादा परखा जाता है। यह भी देखा जाता है कि इसके अंदर टीम के साथ चलने की कितनी चाह है। इसके अंदर सकारात्मक सोच है या नहीं।

3️⃣ सब एडिटर/रिपोर्टर 

यह हिंदी अखबारों का मैच्योर पद है। इस पद के लोगों को बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। इसलिए इस लेबल पर इंटरव्यू थोड़ा टफ़ हो जाता है। इसे अनेक एंगल से ठोक बजाकर देखा जाता है। यह परखा जाता है कि काम का दबाव पड़ने पर इसका व्यवहार कैसा होता है। यह क्राइसिस मैनेजमेंट कैसा कर सकता है। काम के तनाव के साथ कितना पॉजिटिव रह पाता है।

4️⃣ सीनियर सब एडिटर/रिपोर्टर 

आजकल अखबारों में यह पद बड़ी जिम्मेवारियों वाला पद है। इस पद पर आसीन लोगों को पूरी डेस्क संभालने का काम भी सौंपा जाता है। इसलिए इसमें बाकी गुणों के साथ एक विशेष गुण को भी देखा जाता है। यह गुण है नेतृत्व की क्षमता। इंटरव्यू के दौरान यह परखा जाता है कि कैंडिडेट्स में टीम का नेतृत्व करने की क्षमता है या नहीं। यदि है तो कितना प्रतिशत है। इसे मापने का कोई स्केल तो नहीं है लेकिन इंटरव्यू करने वाले के अंदर इसे भांपने के टूल्स होते हैं और वे उन्हीं टूल्स के सहारे इसे माप लेते हैं। यदि किसी व्यक्ति में नेतृत्व की क्षमता कम होती है तो यह देखा जाता है कि भविष्य में इस क्षमता को विकसित करने की संभावना है या नहीं।

5️⃣ चीफ सब एडिटर/रिपोर्टर 

किसी भी अखबार में इस पर दो-चार लोग ही होते हैं क्योंकि यह पद महंगा भी है और बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने वाला भी है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को पूरे संस्करण को निकालने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इसलिए इसमें हर तरह के गुणों की जरूरत होती है। नेतृत्व क्षमता, समन्वय की स्किल के साथ-साथ उन्नत न्यूज सेंस को भी परखा जाता है। इसे स्वतंत्र रूप से खबरों के बारे में निर्णय लेना पड़ता है, इसलिए मजबूत और स्थिर न्यूज सेंस का होना जरूरी है। 

इसके ऊपर डिप्टी न्यूज एडिटर, न्यूज एडिटर और रेजिडेंट एडिटर होते हैं। इन पदों के लिए इंटरव्यू में अनेक तरह की स्किल और चिंतन को परखा जाता है। अगले पोस्ट में इस पर चर्चा करेंगे। 

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