Saturday, 24 May 2025

सोशल मीडिया उपवास

दिमाग की शुद्धि भी है जरूरी 

धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि उपवास करने से अंत:करण शुद्ध होता है, आत्मा शुद्ध होती है। इसका असर हमारे शरीर और मन पर पड़ता है। इससे पॉजिटिव एनर्जी उत्पन्न होती है।

विज्ञान कहता है कि उपवास करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। शरीर में मौजूद गुड बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं और फिर वे बैड बैक्टीरिया को खाने लगते हैं। इससे हमारे शरीर का सिस्टम चुस्त-दुरुस्त हो जाता है।

सच क्या है, पता नहीं। लेकिन उपवास में कुछ न कुछ बात तो जरूर है, तभी तो धर्म और विज्ञान दोनों इसकी वकालत करते हैं। 

तो क्यों न एक बार सोशल मीडिया का उपवास रखकर देखा जाए। पूरे दिन का संभव नहीं हो तो पहले चार घंटे के उपवास से शुरू किया जाए। इन चार घंटों को अपने हिसाब से चुनें। शुरू में आप चाहें तो दो-दो घंटे का अलग-अलग समय भी चुन सकते हैं। चूंकि यह आपका खुद का निर्णय है तो इसमें इमानदार रहना भी आपकी ही जिम्मेवारी है। 

इसका फायदा क्या होगा- 

-आप अपनी आत्मशक्ति को तौल सकेंगे कि आप अपने निर्णय पर कितना अडिग रहते हैं।

-आपको कुछ नया करने का समय मिलेगा। चार घंटों में आप कुछ लिख सकते हैं, कुछ सीख सकते हैं।

-परिवार को लंबा समय दे सकेंगे। एकदम ख़ालिस समय। 

-दोस्तों की खोज खबर ले सकते हैं। पास-पड़ोस को टटोल सकते हैं। 

-सोशल मीडिया से दूर रहने का मतलब यह भी है कि आप बहुत हद तक फेक खबरों से भी दूर रहेंगे तो बेवजह के तनाव से भी दूर रहेंगे।

मतलब यह कि आप जो चाहें वो कर सकते हैं। भोजन से दूर रहने से मेटाबॉलिज्म ठीक होता है तो सोशल मीडिया से दूर रहकर दिमाग का तंत्र दुरुस्त क्यों नहीं हो सकता है।  


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