Monday, 19 May 2025

गाइडेड मिसाइल की तरह काम करती है फेक न्यूज

 कृत्रिम बनाम असली पत्रकारिता 


जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम मेधा का है। चारों तरफ इसकी चर्चा चल रही है। हालांकि अब बात चर्चा से बहुत आगे निकल चुकी है। अब कृत्रिम मेधा हमारे जीवन का अंग बनती जा रही है। हमें पता भी नहीं चलता कि हम कब, कहां, किस रूप में किस आर्टिफिशियल अवतार से मदद ले रहे हैं या हमसे बात कर रहा कौन सा इंसान असली इंसान नहीं है। कृत्रिम मेधा अभी तक इस स्थिति में नहीं पहुंची है कि मानव समुदाय को उससे खतरा महसूस होने लगे लेकिन कृत्रिम पत्रकारिता की बात ही अलग है। कृत्रिम पत्रकारिता हमारे जीवन में कितनी तोड़फोड़ मचा रही है, इसका आकलन अभी तक किसी एजेंसी ने संभवतः नहीं किया है। इसलिए इसका सही-सही अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है फिर भी कुछ कोशिश तो की ही जा सकती है कि इसने इंसानों का क्या छीना है, समाज और देश का क्या छीना है। यह भी खोज का विषय है कि यदि इसे रोका नहीं गया तो यह हमारे जीवन से कुछ चीजों का नामोनिशान मिटा देगी। सबसे पहले तो यह समझते हैं कि कृत्रिम पत्रकारिता है क्या और इसने हमारा क्या छीना है-

*️⃣ फेक न्यूज 

कृत्रिम पत्रकारिता की पहली श्रेणी है फेक न्यूज। इसका मतलब है कि जो न्यूज है ही नहीं फिर भी आपके सामने न्यूज की तरह पेश किया जाए। पेश करने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। कोई बोल कर तो कोई लिख कर पेश करता है। इसमें सच्चाई और यथार्थ नहीं होता है लेकिन यह जबरदस्त तरीके से आपके अंदर भरोसा जगाता है क्योंकि इसमें मिर्च-मसाला बहुत होता है। 

ऐसी खबरें आपके अंदर के विवेक को कुंद करती हैं।

*️⃣ प्रबंधित पत्रकारिता यानी मैनेज्ड न्यूज 

इस श्रेणी की खबरों को कोई अदृश्य शक्ति कहीं दूर बैठ कर मैनेज करती है। यह तय करती है कि खबर के अंदर किन तथ्यों को डालना है या नहीं डालना है। सच्चाई का कितना प्रतिशत इसमें डाला जाएगा। इस अदृश्य शक्ति के हजारों हाथ होते हैं। किसी भी रूप यह शक्ति आप पर दबाव डाल सकती है। वैसे खबरों के प्रकाशन का प्रबंधन पीआर एजेंसियां करती हैं जो खबरों का प्रकाशन सुनिश्चित करती हैं। 

ऐसी खबरें सच जानने के आपके अधिकार को सीमित करती हैं।

*️⃣ नियंत्रित पत्रकारिता यानी कंट्रोल्ड न्यूज 

कहने को तो पत्रकारिता स्वतंत्र है, वाणी की आजादी है। लेकिन यह आजादी निरंकुश नहीं है। इस पर स्व अनुशासन का नियंत्रण है। यह तो पॉजिटिव है। लेकिन इस पर एक और नियंत्रण होता है जो इसकी दशा और दिशा तय करता है। यह नियंत्रण इमानदार नहीं है क्योंकि इसकी मंशा पत्रकारिता को अपने स्वार्थ के हिसाब से अपने लाभ के लिए चलाने की होती है। यह नियंत्रण अंदर से भी हो सकता है और बाहर से भी।

ऐसी खबरें आपको गुमराह कर सकती हैं।

*️⃣ निर्देशित पत्रकारिता यानी डायरेक्टेड न्यूज 

यह एक खास तरह की पत्रकारिता है जो आज के युग का यथार्थ है। चाहकर भी हम इससे अपना दामन नहीं बचा सकते हैं क्योंकि यह निर्देश बहुत ऊंचे स्तर से आता है। यह जहां से आता है वहां हमारी सांसों की डोर बंधी होती है या फिर वहां से पूरे देश को निर्देश जाता है। एक उदाहरण देता हूं -आप अपने पसंद के टीवी चैनल पर आराम से पसंदीदा कार्यक्रम देख रहे हैं और अचानक टीवी स्क्रीन पर देश के नेता की तस्वीर उभरती है और शुरू हो जाता है भाइयो और बहनो। 

निर्देशित पत्रकारिता आपके च्वाइस के अधिकार को सीमित करती है।

*️⃣ गाइडेड पत्रकारिता यानी गाइडेड न्यूज 

आपने गाइडेड मिसाइल के बारे में सुना होगा। अभी हाल में इन मिसाइलों ने पाकिस्तान के खिलाफ अपना जलवा दिखाया भी है। खबरें भी इन्हीं गाइडेड मिसाइल की तरह होती हैं। इनमें भी टारगेट फिक्स कर इसे फ्लोट कर दिया जाता है। यह आमतौर पर चैनलों और सोशल मीडिया पर होता है। किसी खास व्यक्ति, संस्थान या विचार को बदनाम करने में गाइडेड पत्रकारिता का खूब इस्तेमाल होता है। 

ऐसी पत्रकारिता आपको बरगलाने का काम करती है।


*️⃣ आंशिक पत्रकारिता यानी पार्शियल रिपोर्टिंग 

आंशिक पत्रकारिता का मतलब अधूरी जानकारी वाली खबरों से है। आप कभी-कभी अखबारों में पढ़ते होंगे कि आपके शहर में आयकर विभाग ने छापा मारकर करोड़ों की अवैध संपत्ति जब्त कर ली लेकिन जब आप खबर में उस व्यक्ति का नाम खोजते होंगे तो लिखा मिलता होगा कि एक बड़े बिजनेसमैन के घर यह छापा पड़ा था। अब आप बेचैन होकर शहर के दूसरे अखबार में उस खबर को खोजते होंगे लेकिन वहां भी नाम नहीं मिला होगा। यह है अधूरी पत्रकारिता या आंशिक पत्रकारिता। उस बिजनेसमैन ने अखबारों को या स्थानीय रिपोर्टर को मैनेज कर लिया और खबर से अपना नाम गायब करवा दिया। 

ऐसी पत्रकारिता सूचना पाने के आपके अधिकार पर डाका डालती है।

तो अब आपके सामने यह स्पष्ट हो गया है कि कृत्रिम पत्रकारिता किस कदर हमारी चीजों को हमसे छीन रही है और हम इसे समझते हुए भी इसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि जमाना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, रियल इंटेलिजेंस का नहीं। 

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#journalism #artificialjournalism #fecknews 


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