पत्रकार होने के नाते क्या आपने कभी अखबार के फोल्ड के ऊपर और फोल्ड के नीचे की स्पेस के बारे में सोचा है? समझा है कि इन दोनों स्पेस का क्या महत्व है? आइए आज इसके बारे में समझने की कोशिश करते हैं
ब्रॉड शीट अखबार 50-52 सेंटीमीटर लंबा और 32-33 सेंटीमीटर चौड़ा होता है। यह अमूमन आठ कॉलम में विभक्त होता है। द टेलीग्राफ अपवाद है। इसे जब बराबर साइज में मोड़ा जाए तो लगभग 25-25 सेंटीमीटर में बंटता है। यानी 25 सेंटीमीटर ऊपर का हिस्सा और 25 सेंटीमीटर नीचे का हिस्सा। यह जो ऊपर का हिस्सा है, यह अखबारों के लिए सबसे कीमती स्पेस है। खबरों के लिहाज से यह स्पेस सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यही हिस्सा सामने दिखता है और इस स्पेस पर छपी खबरें या सामाग्रियां ही उन पाठकों को आकर्षित करती हैं जो फ्लोटिंग हैं। अखबार की दुनिया में फ्लोटिंग रीडर्स सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये रीडर्स किसी एक अखबार के समर्पित पाठक नहीं होते हैं। इनके बारे में यह कहा जाता हैं यह स्टॉल्स पर जाते हैं और जिस अखबार की खबरें उन्हें अच्छी लगती हैं, वे उसे खरीद लेते हैं। स्पष्ट है कि उन्हें अखबार के फोल्ड के ऊपर की खबरें ही दिखाई पड़ती हैं और वे इन्हीं खबरों के आधार पर अखबार खरीदते हैं। हालांकि ऐसे पाठकों को अखबार बेचने के मामले में अखबार विक्रेता भी अपनी मनमर्जी चलाते हैं। अखबारों की दुनिया में फ्लोटिंग रीडर्स को मेहमान पाठक भी कहा जाता है और अखबार वाले इन मेहमान पाठकों को अपने घर में स्थायी तौर पर बसाने की कोशिश करते रहते हैं। यह कोशिश कैसे की जाती है, इसके बारे में फिर कभी बात करेंगे।
इस तरह हमने देखा कि अखबार का ऊपरी हिस्सा यानी अखबार का फर्स्ट फोल्ड कितनी बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए अखबार का फर्स्ट फोल्ड बहुत ही चुस्त और विविधतापूर्ण तरीके से बनाया जाता है। इस स्पेस की खबरों का चयन खबरों की पठनीयता के आधार पर किया जाता है। लीड और सेकेंड लीड के अलावा उन खबरों को लगाया जाता है जो लोगों की रुचि और जरूरत के अनुरूप होती हैं। जाहिर है इस स्पेस पर पाठकों को खींच कर लाने वाली खबरें लगाने का प्रयास किया जाता है।
यह स्पेस विज्ञापनों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस स्पेस पर अक्सर आठ कॉलम की पांच सेंटीमीटर चौड़ी पट्टी वाला विज्ञापन लगाया जाता है। इस विज्ञापन के लिए अखबार चार्ज भी तगड़ा वसूलते हैं। यह चार्ज अखबारों की हैसियत के हिसाब से तय होता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अखबार का निचला हिस्सा यानी सेकेंड फोल्ड कम महत्वपूर्ण होते हैं। अखबार जब पूरा खुलता है तब दोनों फोल्ड सामने होते हैं और यही पूरा अखबार है। अखबार खुलने के बाद दोनों फोल्ड का महत्व बराबर हो जाता है। इसलिए किसी भी अखबार के पूरे पेज वन को एक जैसी गंभीरता और शिद्दत के साथ तैयार किया जाता है। ऐसा नहीं है कि फर्स्ट फोल्ड पर ज्यादा और सेकेंड फोल्ड पर कम मेहनत की जाती है। दोनों फोल्ड पर समान मेहनत की जाती है ताकि पूरा पेज वन मजबूत और पठनीय बन सके।
पेज वन में ही अखबारों की जान बसी होती है। इसलिए इस पेज को तैयार करने में अखबार की क्रीम टीम को लगाया जाता है। इसमें उप संपादक से लेकर संपादक तक सक्रिय रूप से लगे रहते हैं। खबरों के चयन से लेकर खबरों की प्लेसिंग तक सावधानी रखनी होती है। एक भी खबर की गलत प्लेसमेंट दूसरे दिन अखबार को नुक़सान पहुंचा सकती है।
पत्रकारिता के छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के अखबारों के पेज वन का अध्ययन करना चाहिए और इस पर अपने नोट्स बनाने चाहिए। भविष्य में ये काम आएंगे।
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