मैनेज अंग्रेजी का एक छोटा सा शब्द है लेकिन इसकी महिमा अपरम्पार है और इसके कारनामे भी बड़े-बड़े हैं। इस एक शब्द में इतनी ताकत है कि यह अकेले ही पत्रकारिता की दिशा और दशा दोनों को बदल सकता है, बदल रहा है। आज की पत्रकारिता में इस शब्द का इस्तेमाल बड़े प्यार, एहतियात के साथ बारंबार किया जाता है लेकिन कब इसके इस्तेमाल की जरूरत आ जाए, यह कोई नहीं जानता।
इसी शब्द से बना है मैनेजमेंट जिसे पढ़ाने के लिए आईआईएम जैसे महान संस्थानों के साथ-साथ ढ़ेर सारी छोटी-बड़ी दुकानें भी खुली हैं। मैनेजमेंट का कोर्स करने में लाखों रुपए खर्च होते हैं लेकिन इसे करने के बाद लाखों-करोड़ों रुपए की नौकरी भी मिल सकती है। यह छोटा-सा शब्द मैनेज जब एक वाक्य में बोला जाता है 'मैनेज कर लो' तब बहुत कुछ बदल जाता है। बड़े-बड़े कांड फुस्स हो जाते हैं, छोटे-छोटे काम विस्फोटक बन जाते हैं। पत्रकार मैनेज हो जाता है, अखबार मैनेज हो जाता है। अफसर मैनेज हो जाते हैं, सरकार मैनेज हो जाती है। भारी भीड़ मैनेज हो जाती है, विरोध मैनेज हो जाता है। न जाने क्या-क्या मैनेज हो जाता है। इस शब्द की खूबी यह है कि इसे विस्तार से बताने की जरूरत नहीं पड़ती है। सिर्फ मैनेज शब्द का उच्चारण ही काफी है। इसे बोलने और सुनने वाले को पता होता है कि क्या मैनेज करना है, कहां मैनेज करना है, कैसे मैनेज करना है। मैनेज शब्द का इस्तेमाल भी दो तरह से होता है -
*️⃣ पॉजिटिव इस्तेमाल *️⃣ निगेटिव इस्तेमाल
पॉजिटिव इस्तेमाल
अच्छे कामों के लिए भी मैनेज शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। सीनियर अपने जूनियर को मैनेज करने का निर्देश देता है, दोस्त अपने दोस्त को कह सकता है, पिता अपने बच्चों को कह सकता है। इसमें काम को पूरा करने का भाव छिपा होता है। यह इस शब्द का पॉजिटिव इस्तेमाल है।
निगेटिव इस्तेमाल
मैनेज शब्द का निगेटिव इस्तेमाल ज्यादा व्यापक है क्योंकि इसका असर दूरगामी है। यह जितना छोटा सा शब्द है, इसका अर्थ उससे कहीं ज्यादा बड़ा है। जब इस शब्द को काम पर लगाया जाता है तो उसका परिणाम भी तय कर दिया जाता है। यानी मैनेज करने वाले को पता होता है कि इस काम का क्या अंजाम होना है। इसे यों भी समझ सकते हैं कि काम का अंजाम अपने पक्ष में करने के लिए इस शब्द को काम पर लगाया जाता है।
आपको यूपीए-2 सरकार के दौरान नीरा राडिया टेप मामला तो याद होगा। जब यह कांड उजागर हुआ था तब कई बड़े-बड़े पत्रकारों के नाम भी इसमें आए थे। सीबीआई जांच भी हुई थी, कोर्ट में मामला भी चला था। हालांकि बाद में सीबीआई ने इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन इस कांड ने पत्रकारिता में मैनेज शब्द की महिमा को उजागर कर दिया था।
वैसे सिर्फ पत्रकारिता ही नहीं, जीवन के हर क्षेत्र में इस शब्द का इस्तेमाल होता है। इसलिए मैनेज शब्द महान था, है और रहेगा। इसकी महानता पर शोध हो सकता है। सरकार को चाहिए कि इस शब्द को पीएचडी वाले विषयों वाली सूची में शामिल कर ले। इसका फायदा यह होगा कि इस शब्द के और भी नायाब इस्तेमाल निकल सकते हैं।
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