अक्सर चर्चा चलती है दफ्तर का माहौल जहरीला था, इसलिए जॉब छोड़ दी। दफ्तर का माहौल बर्दाश्त करने लायक नहीं था, इसलिए नौकरी को लात मारकर निकल गया। इन स्थितियों में टॉक्सिक माहौल को दोषी करार देकर भाग खड़े होते हैं। यह नहीं सोचते कि इस माहौल को यदि बदला नहीं जा सकता है तो कम से कम लड़ा तो जा सकता ही है। लड़ने के लिए ये दो फार्मूले अपनाए जा सकते हैं -
- माहौल के जहर से बचने के लिए मौन का मास्क लगाओ।
-जहर के असर को दूर रखने के लिए कभी-कभी नकली फुंफकार भरो।
इतने से काम न बने तो कभी-कभी मोबाइल पर तेज आवाज में किसी से भी झगड़ लो और पूरे आफिस को थर्रा दो, गुंजायमान कर दो।
इस फार्मूले से कम से कम दस दिनों तक जहर पास नहीं फटकेगा। दस दिन बाद फिर इसे रिपीट कर दो।
No comments:
Post a Comment